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'मिशन पूरा होने तक डटे रहेंगे सैनिक' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि ब्रितानी सैनिक उस समय तक अफ़ग़ानिस्तान में रहेंगे जब तक मिशन पूरा नहीं हो जाएगा. अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई से मुलाक़ात के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को एक लोकतांत्रिक देश में रहने का मौक़ा मिलना चाहिए. उन्होंने अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई की सराहना की और कहा कि उनके नेतृत्व में अफ़ग़ानिस्तान ने असाधारण प्रगति की है. प्रधानमंत्री ब्लेयर दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में तैनात ब्रितानी सैनिकों से भी मिले. उन्होंने वहाँ नैटो सेना के प्रभारी से भी मुलाक़ात की. नैटो के अधीन ही ब्रितानी सेना काम कर रही है. ब्लेयर ने कहा कि ब्रिटेन सुरक्षा, पुनर्निर्माण और विकास कार्यों की चुनौती से निपटने के लिए अफ़ग़ानिस्तान की पूरी सहायता करने के लिए तैयार है. 'आतंकवाद' उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी अब समझ गया है कि अफ़ग़ानिस्तान में सैनिक कार्रवाई के बाद से वहाँ सिर्फ़ सरकार में परिवर्तन की ही आवश्यकता नहीं. ब्रितानी प्रधानमंत्री ने कहा कि ये पीढ़ियों का संघर्ष है. उन्होंने कहा, "तालेबान, अल क़ायदा और दुनियाभर में फैले आतंकवाद की जड़ें गहरी हैं. अफ़ग़ानिस्तान जैसे देश में उन्हें अपने पैर जमाने में मदद मिलती है. इन्हें पूरी तरह ख़त्म करने में समय लगेगा." लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अफ़ग़ानिस्तान में विकास के लक्षण दिख रहे हैं और इससे भविष्य के लिए उम्मीदें बँधती हैं. अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति ने कहा कि देश में प्रगति हुई है और पिछले चार साल से भी कम समय में 45 लाख शरणार्थी वापस अपने देश लौटे हैं. उन्होंने कहा कि तालेबान के शासनकाल में लोग अफ़ग़ानिस्तान से भाग रहे थे. लेकिन अब लोग लौट रहे हैं. करज़ई ने कहा, "अभी जब हम बातें कर रहे हैं, इस समय भी वे हमारे पड़ोस और दुनिया के अन्य हिस्सों से आ रहे हैं." सैनिकों से मुलाक़ात राष्ट्रपति करज़ई से मुलाक़ात के पहले ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने हेलमंद प्रांत में 800 ब्रितानी सैनिकों से मुलाक़ात की और उन्हें धन्यवाद दिया.
ब्लेयर ने कहा कि रेगिस्तान के जिस छोटे से हिस्से में वे संघर्ष कर रहे हैं, वही दुनिया की सुरक्षा का भविष्य तय होना है. उन्होंने कहा कि उनका मिशन वैसा ही महत्वपूर्ण है जैसा पाँच साल पहले तालेबान शासन को उखाड़ने का था. ब्लेयर ने अफ़ग़ानिस्तान से पहले पाकिस्तान की यात्रा की थी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से मुलाक़ात की थी. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने मुलाक़ात के बाद कहा था कि सिर्फ़ सैनिकों के दम पर आतंकवाद और धार्मिक कट्टरपंथ का मुक़ाबला नहीं किया जा सकता. उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया था कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति के समर्थक लोगों के लिए व्यापाक पुनर्निर्माण सहायता की ज़रूरत है. | इससे जुड़ी ख़बरें पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान में बाढ़, 50 की मौत19 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'दिल्ली घोषणापत्र में समयबद्ध योजना नहीं'19 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'अस्थिर अफ़ग़ानिस्तान क्षेत्र के लिए ख़तरा'18 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'अफ़ग़ानिस्तान बनेगा व्यापारिक केंद्र'18 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा बढ़ती ही जाएगी'16 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'अहम अल-क़ायदा सदस्य पकड़ा गया'14 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'अफ़ग़ानिस्तान में चार गुना ज़्यादा मौतें'12 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बाजौड़ कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन03 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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