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'दिल्ली घोषणापत्र में समयबद्ध योजना नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान के विकास के लिए द्वितीय क्षेत्रीय सहयोग सम्मेलन रविवार को दिल्ली में समाप्त हो गया. सम्मेलन की समाप्ति पर दिल्ली घोषणापत्र जारी हुआ. इस घोषणापत्र में अफ़ग़ानिस्तान में व्यापार, कृषि और ऊर्जा के विकास के लिए उठाए जाने वाले क़दमों की तो बात की गई है लेकिन किसी समयबद्ध योजना की घोषणा नहीं हुई. ज़ाहिर सी बात है तालेबान से मिल रही चुनौती और हिंसा को नियंत्रित करने के उपायों पर भी विशेष तौर पर चर्चा हुई. दिल्ली के विज्ञान भवन में दिल्ली घोषणा पत्र की जानकारी देते हुए भारत और अफ़ग़ानिस्तान के नेताओं ने क्षेत्र में अफ़ग़ानिस्तान के महत्व की चर्चा करते हुए इसे क्षेत्र का वो पुल बताया जो एशिया और यूरोप के बीच व्यापार का एक बड़ा माध्यम बन सकता है. लेकिन तालेबान की बढ़ती ताक़त और हिंसा को एक बड़ी बाधा भी माना जा रहा है. अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री आरडी स्पांटा ने कहा एशिया के कई इलाकों से हो रहे आतंकवाद का निर्यात रोकना होगा. उन्होंने कहा, "आतंकवाद को रोकने का बेहतरीन तरीक़ा यही होगा कि क्षेत्र के सभी देशों के बीच परस्पर आर्थिक निर्भरता बढ़े जो उनके हितों को साझा लक्ष्यों की ओर बढ़ाएगा." आपसी सहयोग दिल्ली घोषणा पत्र में क्षेत्र के देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने के उपायों पर बल दिया गया. इसी के तहत तुर्कमेनिस्तान अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के बीच गैस पाइप लाइन की दिशा में काम को तेज़ करने पर सहमति हुई. अफ़गानिस्तान के वित्त मंत्री डाक्टर अनवारूल हक़ एहदी ने कहा कि पाकिस्तान के सहयोग से अफ़गानिस्तान के विकास में काफ़ी मदद मिलेगी. उन्होंने कहा, "पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान को क्षेत्र के और देशों के साथ ज़मीनी रास्ते से जोड़ने के उपक्रमों मे सहयोग का वादा किया है. साथ ही वो उर्जा के व्यापार में भी अफग़ानिस्तान के साथ काम करेगा जिसका पाकिस्तान को भी फ़ायदा होगा." अफ़ग़ानिस्तान के वित्त मंत्री ने कहा कि उनका देश कृषि के क्षेत्र में तकनीक और कृषि ऋण की व्यवस्थाओं की जानकारी की उम्मीद भी अपने पड़ोसियों से करता है. सम्मेलन में इस बात पर भी सहमति हुई कि अफ़ग़ानिस्तान में निजी व्यापार क्षेत्र के विकास के लिए विशेष क़दम उठाए जाएँगे और कानूनों में सुधार किए जाएँगे. जैसा कि आप जानते हैं भारत अफ़ग़ानिस्तान में कई परियोजनाओं में मदद दे रहा है. भारतीय कंपनियों के कर्मचारी वहाँ परियोजनाओं के लिए काम कर रहे हैं. इन कर्मचारियों को सुरक्षा देने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं यह पूछे जाने पर भारतीय विदेशमंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि भारतीय कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए अफ़ग़ान सरकार के साथ मिल कर भारतीय अर्धसैनिकबलों की भी मदद ली जा रही है. सम्मेलन में क्षेत्रीय विकास के लिए आवश्यक कार्यक्रमों का अध्ययन करने के लिए काबुल में एक स्थाई संस्था बनाने का संकल्प भी किया. लेकिन जानकारों का मानना है कि क्षेत्र की विभिन्न ताक़तों में अभी भी हितों का टकराव इतना स्पष्ट है कि कोई ठोस और महत्वकांक्षी योजना सामने नहीं आई. | इससे जुड़ी ख़बरें 'अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा बढ़ती ही जाएगी'16 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'अफ़ग़ानिस्तान में चार गुना ज़्यादा मौतें'12 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'आत्मदाह कर रही हैं अफ़ग़ान महिलाएँ'15 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में '70 चरमपंथी मारे गए'29 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में धमाका, 14 लोगों की मौत27 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस पचास तालेबान विद्रोही मारे गए25 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस ब्लेयर का सैनिकों को मदद का भरोसा07 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना बुश-मुशर्रफ़-करज़ई की अहम बैठक27 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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