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'अफ़ग़ानिस्तान बनेगा व्यापारिक केंद्र' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान पर आयोजित सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उम्मीद जताई है कि अफ़ग़ानिस्तान व्यापार के लिए एक आकर्षक केंद्र बनेगा. दिल्ली में अफ़ग़ानिस्तान के विकास के लिए आयोजित द्वितीय क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग सम्मेलन में नेताओं ने विकास और व्यापार के अवसरों की चर्चा की और माना कि वहाँ सुरक्षा आज भी सबसे बड़ी चुनौती है. इस सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "जिस प्रकार क्षेत्र और विश्व के अन्य देशों की सहायता से अफ़ग़ानिस्तान में विकास के लिए रास्ते बने हैं उससे यह देश अब व्यापार के लिए एक आकर्षक केंद्र बन जाएगा." प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पिछले एक साल में अफ़ग़ानिस्तान को आर्थिक विकास की राह पर लाने के लिए करज़ई सरकार की सराहना की. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में व्यापार के लिए आवश्यक ढाँचागत सुधार हो चुके हैं और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बन गया है जिसका फ़ायदा अफ़गानिस्तान के साथ-साथ उसके पड़ोसी और अन्य देश उठा सकते हैं. व्यापार इस सम्मेलन में कई देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ व्यापार जगत के नेता भविष्य में व्यापार समझौतों को अमली ज़ामा पहनाने, अफ़ग़ानिस्तान में बिजली और जल प्रबंधन की परियोजनाओं और उसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार को और अधिक विकसित करने के लिए बातचीत करेंगे. अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा कि पाँच साल पहले अफ़ग़ानिस्तान के साथ विश्व व्यापार जो केवल दस करोड़ डॉलर का था वो अब बढ़ कर ढाई अरब डॉलर तक पहुंच गया है. लेकिन भारतीय प्रधानमंत्री की तरह उन्होंने इस बात पर बल दिया कि क्षेत्र में स्थिरता के लिए अफ़ग़ानिस्तान में स्थिरता अत्यंत महत्वपूर्ण है. राष्ट्रपति करज़ई ने कहा कि अतिवाद और आतंकवाद लोगों के रोज़गार को भी निशाना बना रहे हैं. उन्होंने इस अवसर पर अफ़गानिस्तान में मौजूद अंतरराष्ट्रीय सैनिकों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि ये सिर्फ़ उनके देश की सुरक्षा ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और उनका काम अभी बाक़ी है क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान अभी भी ख़तरे से बाहर नहीं है. सम्मेलन के उद्देश्यों की चर्चा करते हुए भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि सम्मेलन में यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि पिछले एक साल में अफ़ग़ानिस्तान में कितनी प्रगति हो पाई है और आगे क्या किया जा सकता है. प्रणव मुखर्जी ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान का आर्थिक विकास दक्षिण एशिया में सुरक्षा की चिंताओं को दूर करने में अहम साबित होगा. इस सम्मेलन का एक उद्देश्य सहयोगी राष्ट्रों को यह समझाना भी है कि अफ़ग़ानिस्तान के साथ व्यापार से उनका भी फ़ायदा हो सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें अमरीका हमें न भुलाए:करज़ई27 फ़रवरी, 2003 | पहला पन्ना सैनिकों का नियंत्रण सौंपने से इनकार24 मई, 2005 | पहला पन्ना जीत की ओर अग्रसर करज़ई21 अक्तूबर, 2004 | पहला पन्ना अफ़ग़ानिस्तान में नई उम्मीदें11 नवंबर, 2002 | पहला पन्ना काबुल में 'षड्यंत्रकारी' गिरफ़्तार30 जनवरी, 2003 | पहला पन्ना अफ़ग़ान सरकार की गुहार14 अगस्त, 2003 | पहला पन्ना कार्रवाई में 80 अफ़ग़ान 'चरमपंथी' मरे12 जून, 2004 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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