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शनिवार, 18 नवंबर, 2006 को 11:10 GMT तक के समाचार
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'अस्थिर अफ़ग़ानिस्तान क्षेत्र के लिए ख़तरा'
अफ़गानिस्तान पर सम्मेलन
इस सम्मेलन में कई देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं
अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता पूरे इलाक़े में शांति और समृद्धि के लिए ख़तरा है.

भारत में अफ़ग़ानिस्तान पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उदघाटन भाषण में राष्ट्रपति करज़ई ने कहा कि देश में ख़राब बुनियादी सुविधाओं और नीतियों में अस्थिरता के कारण क्षेत्रीय स्तर पर आर्थिक सहयोग में बाधा आ रही है.

अफ़ग़ानिस्तान पर आयोजित यह दो दिवसीय सम्मेलन भारत की राजधानी नई दिल्ली में हो रहा है.

राष्ट्रपति करज़ई का बयान ऐसे समय आया है जब संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम ने भी चेतावनी दी है कि वह जाड़े में लाखों अफ़ग़ानों के लिए भोजन नहीं उपलब्ध करा सकता क्योंकि उसके पास पर्याप्त धन नहीं.

दरअसल ठंड के समय लाखों अफ़गान खाना-पानी के लिए विश्व खाद्य कार्यक्रम पर भी निर्भर रहते हैं. इस बीच पिछले दिनों देश के पश्चिमी इलाक़े में आए बाढ़ के कारण मारे गए 50 लोगों के शव मिले हैं.

गुरुवार को एकाएक आई भारी बारिश के कारण बड़ी संख्या में लोग लापता हैं. स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि भारी बारिश और फिर बाढ़ के कारण मुरग़ब नदी के आसपास के कई गाँव बह गए हैं.

इन इलाक़ों का संपर्क सड़क से टूटा हुआ है. अब नैटो की अगुआई वाली सेना ने हेलिकॉप्टरों की मदद से इलाक़े में रसद भेजने की तैयारी कर रही है.

सम्मेलन

भारत में आयोजित इस सम्मेलन में पाकिस्तान, ईरान और अन्य देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं. इस सम्मेलन का मक़सद पुनर्निर्माण कार्यों में पड़ोसी देशों की मदद हासिल कर अफ़ग़ानिस्तान की अर्थव्यवस्था में सुधार लाया जाए.

सम्मेलन की शुरुआत करते हुए राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल के पाँच साल बाद भी चरमपंथ और हिंसा उनके लिए कड़ी चुनौती बने हुए हैं.

उन्होंने कहा, "हम ये बात मानते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान की स्थिरता इलाक़े के लिए एक संपत्ति की तरह है. दूसरी ओर अस्थिर अफ़ग़ानिस्तान के कारण इलाक़ा शांत और समृद्ध नहीं रह सकता."

उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग की दिशा में सुरक्षा व्यवस्था, बुनियादी सुविधाओं में कमी और अस्थिर नीतियों का प्रमुख योगदान रहता है.

हामिद करज़ई ने कहा कि अगर अर्थव्यवस्था और विकसित रहेगी तो तालेबान विद्रोहियों को कम समर्थन मिलेगा और लोग अफ़ीम की खेती की ओर भी कम ही आकर्षित होंगे.

बीबीसी संवाददाता साइमन वॉट्स का कहना है कि इस सम्मेलन से अफ़ग़ानिस्तान को कुछ सहायता ज़रूर मिल सकती है लेकिन प्रतिनिधि अफ़ग़ानिस्तान की सुरक्षा स्थिति को लेकर ही ज़्यादा चिंतित हैं.

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