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ईरानी परमाणु कार्यक्रम को सशर्त समर्थन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने कहा है कि ईरान को अपने शांतिपूर्ण असैनिक उद्देश्यों के लिए परमाणु कार्यक्रम चलाने का अधिकार है लेकिन ईरान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह भरोसा दिलाना होगा कि उसका परमाणु कार्यक्रम सचमुच शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हैं. भारत सरकार ने ईरानी विदेश मंत्री मनुचेहर मुत्तकी की भारत यात्रा के दौरान शुक्रवार को यह बात कही है. दोनों देशों ने भारत की बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों के माहौल में आपसी सहयोग और मज़बूत करने पर ज़ोर दिया है. दिल्ली में बीबीसी संवाददाता ज्योत्सना सिंह का कहना है कि भारत में पिछले दो दिनों में न सिर्फ़ ईरानी विदेश मंत्री बल्कि रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लैफ़रोफ़ की मेज़बानी भी की है. भारत और रूस दोनों ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हो रहे टकराव के नतीजे जानने के लिए उत्सुक हैं. भारतीय विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने दिल्ली में शुक्रवार को पत्रकारों से कहा कि भारत का विश्वास है कि ईरान को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए अपना परमाणु कार्यक्रम चलाने का अधिकार है. लेकिन प्रणब मुखर्जी ने साथ ही ज़ोर देकर यह भी कहा कि परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षरकर्ता देश के रूप में "ईरान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ कुछ ज़िम्मेदारियों को पूरा करना होगा.. कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है." प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत और रूस इस विचार पर सहमत हैं कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए तमाम साधनों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए और इसके लिए बातचीत और मध्यस्थता का सहारा लिया जाना चाहिए. तनाव और सहयोग भारत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर उठे विवाद के बीच उसके ख़िलाफ़ प्रतिबंधों के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रस्ताव के समर्थन में दो बार मतदान कर चुका है. उसके बाद से भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंध कुछ तनावपूर्ण हो गए थे लेकिन दोनों देशों का अब कहना है कि वह उस तनाव से आगे बढ़ चुके हैं.
ईरान के विदेशमंत्री मनुचेहर ने अपने दो दिन की भारत यात्रा के अंतिम दिन शुक्रवार को उन दो अहम परियोजनाओं पर बातचीत की जिन पर भारत को ईरान से गैस आपूर्ति के लिए काम चल रहा है. इसमें से एक परियोजना के तहत भारत को पचास लाख टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस की बिक्री से संबंधित है और दूसरी परियोजना वो है जिसमें ईरान, पाकिस्तान और भारत शामिल हैं जिसके ज़रिए भारत और पाकिस्तान को गैस आपूर्ति की व्यवस्था होगी. ऐसा समझा जाता है कि गैस की क़ीमतों पर कोई सहमति नहीं बन पाने की वजह से ईरान, भारत और पाकिस्तान गैस पाइपलाइन परियोजना पर बात आगे नहीं बढ़ सकी है. भारत के तेल और प्राकृति गैस मंत्री मुरली देवड़ा ने हालाँकि शुक्रवार को बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि भारत तरलीकृत प्राकृतिक गैस के ठेके के बारे में ईरान की तरफ़ से पेश किए गए ताज़ा प्रस्तावों पर ग़ौर करेगा. इस ठेके पर जून 2005 में तेहरान में हस्ताक्षर किए गए थे. ईरानी विदेश मंत्री मनुचेहर मुत्तकी ने भी दोहराया कि उनका देश दोनों गैस परियोजनाओं पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है जिससे भारत के साथ उसके संबंधों में और मज़बूती आएगी. | इससे जुड़ी ख़बरें 'इराक़ मसले पर ईरान से बातचीत संभव'16 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना 'ईरान, सीरिया उल्लंघन कर रहे हैं'15 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना 'अंतरराष्ट्रीय समुदाय प्रयास तेज़ करे' 27 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना ईरान ने 'परमाणु कार्यक्रम' तेज़ किया27 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना 'बुश शैतान से प्रभावित हैं-अहमदीनेजाद'16 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना बहुमत ईरान पर सैन्य कार्रवाई के ख़िलाफ़21 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना अमरीका-ब्रिटेन पर ईरान का आरोप20 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना ईरान पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ हैं शिराक18 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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