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ईरान पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ हैं शिराक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक शिराक ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मामला सुरक्षा परिषद में भेजे जाने के ख़िलाफ़ अपनी प्रतिक्रिया दी है. ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर जल्द ही सुरक्षा परिषद की बैठक होने वाली है जिसमें उसके ख़िलाफ़ प्रतिबंधों पर भी विचार-विमर्श होगा. लेकिन राष्ट्रपति शिराक का कहना है कि इस मसले का हल सिर्फ़ बातचीत से ही निकल सकता है. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को बातचीत के लिए एजेंडा तय करना चाहिए और छूट भी देनी चाहिए. यूरोप-1 रेडियो के साथ इंटरव्यू में राष्ट्रपति शिराक ने कहा, "मैं बातचीत के बिना किसी भी मसले के हल में विश्वास नहीं रखता. मैं निराशावादी नहीं हूँ. मेरा मानना है कि ईरान एक महान देश है और हम बातचीत के माध्यम से हल निकाल सकते हैं." उनका बयान ऐसे समय आया है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक होने वाली है. उम्मीद है कि राष्ट्रपति शिराक इस मामले पर अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से भी बातचीत करेंगे, जो ईरान पर प्रतिबंध के पक्ष में है. शर्त राष्ट्रपति शिराक ने कहा कि बातचीत शुरू होने के बाद ईरान को अपनी ओर से ही यूरेनियम संवर्द्धन कार्यक्रम रोक देना चाहिए. लेकिन इसे बातचीत के लिए शर्त के रूप में नहीं रखा जाना चाहिए. यूरोपीय संघ के मध्यस्थ हाविया सोलाना ईरान के साथ बातचीत के लिए इसी तरह का प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं. लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ईरानी रुख़ में स्पष्टता न होने के कारण अमरीका इस मामले को लेकर बेसब्री दिखा रहा है. ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा उत्पादन के लिए है. लेकिन अमरीका और अन्य देश ईरान पर आरोप लगाते रहे हैं कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है. अमरीका ईरान के मामले में प्रतिबंध के लिए ज़ोर लगा रहा है लेकिन अन्य यूरोपीय देश इसे लेकर हिचक रहे हैं. वे चाहते हैं कि ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए कोई पेशकश की जाए. फ़्रांस के राष्ट्रपति शिराक का कहना है कि वे नहीं मानते कि प्रतिबंध कभी प्रभावी हो सकते हैं. हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर ज़रूरी हुआ तो वे इसके ख़िलाफ़ नहीं हैं. उन्होंने कहा कि ईरान और इस मामले में सक्रिय बाक़ी के छह देशों- ब्रिटेन, अमरीका, फ़्रांस, जर्मनी, रूस और चीन के बीच बातचीत असरदार हो सकती है. | इससे जुड़ी ख़बरें ईरान को गुटनिरपेक्ष देशों का समर्थन17 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'ईरान पर अमरीकी रिपोर्ट ग़लत'14 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना ईरान ने इराक़ को 'मदद' की पेशकश की12 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'बातचीत में कुछ ग़लतफ़हमी दूर हुई'10 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'ईरान ने लेबनान पर वचनबद्धता दोहराई'03 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना विमान में आग से 30 लोगों की मौत01 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना ईरान ने आईएईए की रिपोर्ट ख़ारिज की01 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना ईरान की समय सीमा का आख़िरी दिन31 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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