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ईरान को गुटनिरपेक्ष देशों का समर्थन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
क्यूबा में गुटनिरपेक्ष देशों के सम्मेलन में ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवाद पर गुटनिरपेक्ष देशों का ज़ोरदार समर्थन मिला है. गुटनिरपेक्ष देशों ने एक बयान जारी कर कहा है कि सभी देशों को शांतिपूर्ण मकसदों के लिए परमाणु ऊर्जा विकसित करने का अधिकार है. क्यूबा की राजधानी हवाना में गुटनिर्पेक्ष देशों का सम्मेलन इसराइल के लेबनान पर किए गए हमले की निंदा और ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम पर समर्थन के साथ समाप्त हो गया है. 'हर देश का अधिकार' गुटनिरपेक्ष आंदोलन के 118 देशों के नेताओं ने एक बयान में कहा, "सभी देशों का मूल अधिकार है कि वे परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए शोध और उत्पादन कर सकें और ये अधिकार उनसे छीना नहीं जा सकता." इन देशों ने शांतिपूर्ण मकसदों के लिए बनाए परमाणु केंदों पर किसी तरह के हमले के ख़िलाफ़ चेतावनी भी जारी की है. लेकिन ईरान से भी गुटनिरपेक्ष देशों ने अनुरोध किया है कि वह संयुक्त राष्ट्र परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ सहयोग करे. अमरीकी एक अभियान चलाता आया है कि ईरान को परमाणु संवर्द्धन करने से रोका जाए क्योंकि परमाणु ईंधन का इस्तेमाल परमाणु हथियारों के लिए किया जा सकता है. उधर ईरान लगातार कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण मकसदों के लिए है. गुटनिरपेक्ष सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने कहा, "दुनिया अमरीका की परमाणु धमकी क्यों सहे?" | इससे जुड़ी ख़बरें गुट निरपेक्ष देशों का सम्मेलन शुरु15 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'मुशर्रफ़ से आतंकवाद पर चर्चा होगी' 15 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'धमाकों से शांति प्रक्रिया मुश्किल हुई'15 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान को प्रधानमंत्री की चेतावनी14 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस भारत और पाकिस्तान की कश्मीर पर चर्चा 18 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस कश्मीर अंतरराष्ट्रीय मसला: पाकिस्तान08 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस कश्मीरी नेताओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया08 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस कोई विदेशी ताकत हमें हुक्म न दे: भारत07 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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