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गुरुवार, 21 सितंबर, 2006 को 05:21 GMT तक के समाचार
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बहुमत ईरान पर सैन्य कार्रवाई के ख़िलाफ़
ईरान का परमाणु संयंत्र
ईरान ने अपना परमाणु क्रार्यक्रम रोकने से इनकार कर दिया है
दुनिया भर में लोग इस पक्ष में नहीं है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आक्रामक क़दम उठाए जाएँ.

जनमत संग्रह में शामिल ज़्यादातर लोग मानते हैं कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम का उद्देश्य परमाणु हथियार बनाना ही है.

जिन लोगों से सवाल पूछे गए, उनमें से अधिकतर लोग मानते हैं कि ईरान का यह विरोध भी जायज़ नहीं है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ़ शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है.

दुनिया के 25 देशों में हुआ बीबीसी वर्ल्ड सर्विस का यह सर्वेक्षण ग्लोबस्कैन और अमरीका के मैरीलैंड यूनिवर्सिटी ने मिलकर किया.

साफ़ राय

इस सर्वेक्षण से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लोगों की राय आश्चर्यजनक रुप से एकदम साफ़ नज़र आई.

सर्वेक्षण में भाग लेने वाले ज़्यादातर लोगों ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम विशुद्ध रुप से शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है.

कोई 60 फ़ीसदी लोगों का मानना था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है.

ईरान का एक परमाणु संयंत्र
ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मामला सुरक्षा परिषद तक जा चुका है

सर्वेक्षण में शामिल 25 देशों में से 19 देशों में ज़्यादातर लोगों की राय इसी तरह की थी.

आश्चर्यजनक ढंग से कई मुस्लिम देशों में भी लोगों की राय इसी तरह की थी.

सर्वेक्षण में भाग लेने वाले लोगों में इराक़ में 60 प्रतिशत, मिस्र में 54 प्रतिशत और इंडोनेशिया में 47 प्रतिशत ने मानते हैं कि ईरान परमाणु हथियार बनाना चाहता है.

सर्वेक्षण में शामिल देशों के लोगों ने कहा कि यदि ईरान परमाणु हथियार बना लेता है तो उन्हें चिंता होगी.

लेकिन नौ देशों, अमरीका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, ब्राज़ील, कनाडा, इसराइल और पोलैंड में लोगों ने कहा कि ईरान के परमाणु बम बना लेने पर वे 'बहुत चिंतित' होंगे.

हालांकि इन चिंताओं के बीच भी लोगों ने ईरान के ख़िलाफ़ कड़े अंतरराष्ट्रीय क़दम उठाए जाने का समर्थन नहीं किया.

इस बात का कम ही लोगों ने समर्थन किया कि यदि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम नहीं रोकता है तो उसके ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई की जाए.

सिर्फ़ 11 प्रतिशत लोग ऐसे थे जिन्होंने ईरान पर हमले का समर्थन किया.

इस सर्वेक्षण में शामिल ज़्यादातर लोगों ने कहा कि वे इस पक्ष में हैं कि ईरान के मामले को कूटनीतिक तरीक़ों से निपटाया जाए.

लेकिन यह स्पष्ट ही नहीं हो सका कि यदि कूटनीति विफल हो जाती है तो क्या करना चाहिए.

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