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बांग्लादेश संकट के हल के लिए पहल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बांग्लादेश की दो प्रमुख पार्टियों बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और आवामी लीग ने कहा है कि वे कार्यवाहक सरकार के मुद्दे पर जारी संकट के हल के लिए मिल कर काम करेंगी. देशभर में इस मुद्दे पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों और हिंसा की घटनाओं में 14 लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हैं. स्थिति को देखते हुए शनिवार को राष्ट्रपति इयाजुद्दीन अहमद ने हस्तक्षेप करते हुए राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बात की. राष्ट्रपति ने दोनों राजनीतिक पार्टियों को रविवार तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री के मुद्दे पर सहमति बनाने को कहा है. ढाका से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राष्ट्रपति की पहल के बाद शांति-व्यवस्था की उम्मीद जताई जा रही है. ख़ालिदा ज़िया के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की सरकार का कार्यकाल शुक्रवार मध्यरात्रि में ख़त्म हो गया था. शनिवार को देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केएम हसन को कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेना था. लेकिन आवामी लीग के विरोध के कारण ऐसा नहीं हो पाया. पहले ये कहा गया था कि केएम हसन बीमार हैं. लेकिन अब केएम हसन ने एक बयान जारी करके पद न संभालने का कारण बताया है. अपने बयान में हसन ने कहा कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री का पद न संभालने का फ़ैसला उन्होंने देश की जनता के हित में एक देशभक्त होने के नाते किया है. केएम हसन ने कहा कि वे देश की सेवा करना चाहते हैं लेकिन राजनीतिक दलों के बीच अविश्वास का ऐसा माहौल है कि वे इस स्थिति में काम नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि उन्होंने ये फ़ैसला किसी राजनीतिक पार्टी के कारण नहीं बल्कि देश की जनता के हित में किया है. आवामी लीग का कहना है कि केएम हसन बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के हाथों की कठपुतली हैं और पार्टी उन्हें कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में नहीं स्वीकार कर सकती. नई स्थिति में शुक्रवार मध्यरात्रि को अपना कार्यकाल समाप्त कर चुकीं ख़ालिदा ज़िया पंद्रह दिनों तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहेंगी. चुनाव बांग्लादेश में जनवरी में आम चुनाव होने हैं. इससे तीन महीने पहले देश में अंतरिम सरकार का गठन किया जाता है ताकि चुनाव निष्पक्ष हो सकें. इसी के तहत शुक्रवार मध्यरात्रि को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सरकार का कार्यकाल ख़त्म हो गया था और शनिवार को नई अंतरिम सरकार को कार्यभार संभालना था. ख़ालिदा ज़िया के नेतृत्व वाली सरकार के विरोध में देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शनों और हिंसा की घटनाओं में नौ लोगों की मौत हो गई है. दरअसल विपक्ष पूर्व मुख्य न्यायाधीश केएम हसन की अगुआई में बनने वाली अंतरिम सरकार का विरोध कर रहा था. विपक्षी आवामी लीग का कहना है कि केएम हसन बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के हाथों की कठपुतली हैं. बांग्लादेश में शुक्रवार तक बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की ही सरकार थी जिसका नेतृत्व ख़ालिदा ज़िया कर रही थी.
बांग्लादेश से बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि पिछले दो-ढाई वर्षों से ये माना जा रहा था कि केएम हसन अंतरिम सरकार चलाने के लिए बीएनपी की पसंद हैं. उस समय भी इसे लेकर मतभेद उभरे थे लेकिन इसका कोई हल नहीं निकल पाया था. विपक्षी आवामी लीग का कहना है कि अगर केएम हसन के नेतृत्व में कार्यवाहक सरकार का गठन होता है तो वे इसका विरोध करेंगे. अपने पाँच साल के कार्यकाल ख़त्म होने के आख़िरी दिन ख़ालिदा ज़िया ने देशभर में शांति की अपील की थी. उन्होंने वादा किया कि जनवरी में होने वाले चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होंगे. उन्होंने इस पर खेद जताया कि मौजूदा राजनीतिक संकट को लेकर विपक्ष के साथ उनकी बातचीत विफल रही. ढाका से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अभी राजधानी में हिंसा की छिटपुट घटनाएँ ही हुई हैं लेकिन यहाँ के लोगों को डर है कि कार्यवाहक सरकार का गठन होने के बाद हिंसा की घटनाएँ बढ़ सकती हैं. पिछले कुछ वर्षों से बांग्लादेश की राजनीति में दो महिलाएँ आवामी लीग की शेख़ हसीना और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की ख़ालिदा ज़िया का दख़ल रहा है. बारी-बारी से इन दोनों को सत्ता भी मिलती रही है. लेकिन कहा जाता है कि वर्षों से इन दोनों नेताओं में बातचीत तक नहीं. गाहे-बगाहे संसद का भी बहिष्कार होता रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें अंतरिम सरकार का शपथ ग्रहण टला27 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'समृद्ध बांग्लादेश दक्षिण एशिया के हित में'21 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस ढाका में प्रदर्शनकारी और पुलिस भिड़े11 जून, 2006 | भारत और पड़ोस बांग्लादेश में राजनीतिक संकट26 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस बांग्लादेश में विपक्ष की 36 घंटे की हड़ताल13 जून, 2006 | भारत और पड़ोस सार्क शिखर बैठक की तारीख़ घोषित11 जून, 2005 | पहला पन्ना 'पाकिस्तानी, बांग्लादेशी महिलाएँ पीछे'21 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना लाखों बच्चे भूखे सोते हैं: यूनिसेफ़02 मई, 2006 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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