|
'पाकिस्तानी, बांग्लादेशी महिलाएँ पीछे' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन में रहने वाली पाकिस्तानी और बांग्लादेशी कामकाजी महिलाओं की दशा देश की बाक़ी महिलाओं की तुलना में काफ़ी ख़राब है. ब्रिटेन में सभी वर्गों के लोगों को एकसमान अवसर उपलब्ध कराने के लिए गठित आयोग इक्वल ऑपरचुनिटी कमीशन की ताज़ा रिपोर्ट में इन दो देशों की महिलाओं की चिंताजनक स्थिति को उजागर किया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तानी और बांग्लादेशी युवा महिलाओं को नौकरी में काफ़ी भेदभाव का सामना करना पड़ता है, आयोग का कहना है कि पाकिस्तानी और बांग्लादेशी महिलाओं को आम ब्रितानी लोगों के मुक़ाबले नौकरी मिलने में काफ़ी दिक्कतें होती हैं. आयोग का निष्कर्ष है कि इन देशों की महिलाओं को अपनी योग्यता के मुक़ाबले नीचे के ओहदों पर काम करना पड़ता है, उनकी निचले दर्जे की नौकरी करने की संभावना दूसरी ब्रितानी महिलाओं की तुलना में चार गुना तक हो सकती है. इतना ही नहीं, ग्रैजुएट पाकिस्तानी और बांग्लादेशी महिलाओं के बेरोज़गार रहने के संभावना किसी ब्रितानी महिला की तुलना में पाँच गुना तक अधिक हो सकती है. आयोग का कहना है कि महिलाओं को सिर ढँकने या बुर्क़ा पहनने की वजह से भी नौकरियों में भेदभाव का सामना करना पड़ता है. वेशभूषा रिपोर्ट तैयार करने के लिए किए गए सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाली महिलाओं में से 20 प्रतिशत का कहना था कि उनकी वेशभूषा के कारण उन्हें बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ता है. आयोग का कहना है कि इन दोनों देशों की महिलाओं से नौकरी के इंटरव्यू में उनकी शादी करने या माँ बनने की योजना के बारे में पूछा जाना आम बात है, नौकरी के मामले में इन सवालों के पूछने पर क़ानूनी रोक है क्योंकि इसे महिलाओं के साथ भेदभाव माना जाता है. आयोग का कहना है कि ये सवाल किसी पाकिस्तानी या बांग्लादेशी महिला से पूछे जाने के आसार किसी गोरी महिला के मुक़ाबले तीन गुना अधिक होते हैं. यह अपनी तरह का पहला सर्वेक्षण है जिसके निष्कर्ष में कहा गया है कि पाकिस्तानी और बांग्लादेशी महिलाओं की महत्वाकांक्षाएँ आम ब्रितानी महिलाओं की ही तरह हैं लेकिन उन्हें मिलने वाले अवसर काफ़ी कम हैं. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||