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बलात्कार के अभियुक्त की हत्या | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महाराष्ट्र के नागपुर शहर में बलात्कार के एक मामले में फ़ैसला आने से पहले ही महिलाओं ने अभियुक्त के ख़िलाफ़ अपना फ़ैसला सुना दिया. शुक्रवार को नागपुर शहर के बीचोंबीच एक अदालत में बलात्कार के मामले में अभियुक्त अप्पू यादव को पेश होना था. जब वे अदालत में पेश हुए तो 30 से अधिक महिलाएँ भी ज़बर्दस्ती अदालत में घुस गईं और भरी अदालत में यादव को चाकू मारा जिससे उसकी मृत्यु हो गई. हमला करने के बाद महिलाएँ अदालत से भाग निकलीं, पुलिस ने इस मामले की तहकीकात शुरु कर दी है. पुलिस का मानना है कि ये हमला सोची-समझी साज़िश के तहत किया गया. जब बीबीसी ने नागपुर के पुलिस आयुक्त शिवानंद से बार-बार इस बारे में बात करने की कोशिश की तो उनका एक ही जवाब था - "मै फ़िलहाल किसी और काम में व्यस्त हूँ." इस मामले के बाद अदालतों में सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि किस तरह चाकू के साथ महिलाओं को अंदर जाने दिया गया. अभियुक्त अप्पू यादव के ख़िलाफ़ दो दर्जन से भी अधिक मामले दर्ज थे पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार अप्पू यादव को अदालत ने ज़िलाबदर भी कर दिया था. नागपुर से स्थानीय पत्रकार प्रकाश दुबे के अनुसार जिन महिलाओं ने अप्पू यादव पर हमला किया उनमें से कुछ उसकी ज़्यादतियों का शिकार भी थीं. हालांकि पुलिस अभी कुछ नहीं कह रही है लेकिन जब अप्पू यादव को अदालत लाया गया तब उसके साथ तीन सिपाही थे और उनके पास कोई हथियार नहीं था. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तीस से भी अधिक महिलाएँ अदालत में घुसीं तब वहाँ न्यायाधीश नहीं थे और अप्पू यादव कटघरे में ही खड़ा था. दो दिन पहले भी जब पुलिस सुनवाई के लिए अप्पू यादव को अदालत लेकर आ रही थी तब भी उनके साथ मारपीट भी हुई थी लेकिन तब पुलिस ने इसे गुटबाज़ी का परिणाम बताकर टाल दिया था. |
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