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श्रीलंका में महिला तैराकी अभियान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
"बहुत सी महिलाओं और बच्चों की जान बच जाती अगर उन्हें तैरना आता." यह कहना है कि श्रीलंका की 44 वर्षीय महिला गिरली गनाज का जो अब तैराकी सीख रही हैं. गिरली गनाज उन 25 महिलाओं में से एक हैं जिन्होंने दिसंबर 2004 में आए भयंकर सूनामी की तबाही देखी है और उनका मानना है कि अगर लोगों को तैराकी आती तो काफ़ी लोगों की जान बच सकती थी. गनाज कहती हैं, "सूनामी से पहले तो यह अकल्पनीय था. आदमी लोग अब भी यक़ीन नहीं करते, जब मैं उन्हें बताती हूँ कि हम तैरना सीख रहे हैं." श्रीलंका में पुरुष और महिलाएँ एक ही तालाब में एक साथ तैराकी नहीं कर सकतीं. ज़्यादातर तैराकी तालाब राजधानी श्रीलंका में हैं इसलिए वहाँ महिलाएँ न के बराबर ही तैराकी सीख पाती हैं. दो बच्चों की माँ 43 वर्षीय पुष्पा कोडिप्पिला का कहना है, "हम अपने तैराकी सूट में समुद्र में नहीं जा सकते. हमें पूरी तरह कपड़े पहनना होगा, इसलिए तैराकी करना लगभग असंभव है." प्रशिक्षण इस योजना की कर्ताधर्ता हैं ब्रिटेन की तैराकी उस्ताद क्रिस्टीन फ़ोन्फ़. उनका मानना है कि सूनामी जैसी तबाही के बाद तो कुछ सांस्कृतिक बाधाओं को तोड़ा ही जाना चाहिए.
"सरकार को महिलाओं को तैराकी सीखने के लिए और ज़्यादा प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. यहाँ समस्या यह भी है कि महिला उस्ताद देखने से भी नहीं मिलती हैं." इस समस्या पर पार पाने के लिए क्रिस्टीन एक स्थानीय 20 वर्षीय छात्रा इन्की सुरांगी को को ब्रिटेन में प्रशिक्षण दिलाना चाहती हैं. जो श्रीलंका लौटकर महिलाओं को तैराकी सिखा सकेंगी. लेकिन ऐसा नहीं है कि तैराकी सीखने का यह अभियान सिर्फ़ महिलाओं तक ही सीमित हो. बच्चों को भी पानी से दोस्ती करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. पूर्व ओलंपिक तैराक जूलियन बोलिंग का कहना था, "बच्चों के दिमाग़ पर सूनामी की तबाही का गहरा असर पड़ा है. वे पानी और समुद्र से बहुत डरे हुए हैं." |
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