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बेबी-81 को मिली माँ की गोद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में सूनामी लहरों की तबाही में मलबे में दबे पाई गई बच्ची - बेबी-81 को लंबे विवाद और डीएनए परीक्षण के बाद आख़िरकार माता-पिता की गोद मिल गई. अभिलाषा नाम की चार महीने की इस बच्ची को बेबी-81 नाम दिया गया था. डीएनए परीक्षण के बाद पुष्टि की गई कि वह मुरुगपिल्लै जयराज और जेनिता जयराज की बेटी है. आठ अन्य दंपतियों ने भी दावा किया थी वह उनकी बच्ची है और मामला अदालत तक पहुँच गया था और अदालत ने बच्ची के असली माता-पिता की पहचान के लिए डीएनए परीक्षण कराने का आदेश दिया था. हालाँकि इस दंपति ने ही क़ानूनी तौर पर बेबी-81 अपनी बच्ची बताने का दावा किया था. अब डीएनए परीक्षण में पुष्टि होने के बाद इस बच्ची को एक छोटे से समारोह में माता-पिता को सौंप दिया है और यह दंपति अपनी बच्ची को लेकर अपने गाँव कलमुनाई रवाना भी हो गया है. रास्ते में दंपति ने एक मंदिर में पूजा अर्चना करके अपनी बच्ची वापस मिलने पर प्रसन्नता ज़ाहिर की. मुरुगपिल्लै जयराज ने बच्ची को वापस पाने के बाद कहा, "हम बहुत ख़ुश हैं लेकिन दुखी भी कि उस तबाही वाले दिन हज़ारों लोग मौत के मुँह में चले गए." सूनामी तबाही से श्रीलंका में 31 हज़ार से भी ज़्यादा लोगों की मौत हो गई. इस दंपति का भी सूनामी तबाही में सबकुछ तबाह हो गया और वह कलमुनाई में एक शिविर में रह रहे हैं. इस महीने के शुरू में इस दंपति ने बेबी-81 को अस्पताल से ज़बरदस्ती ले जाने की कोशिश की थी तो उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था. बाद में ज़मानत पर रिहा किया गया था. |
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