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महिलाएँ भी नाइट शिफ़्ट कर सकेंगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने क़ानून में संशोधन करने का फ़ैसला किया है जिससे महिलाएँ भी रात्रिकालीन ड्यूटी यानी नाइट शिफ़्ट में काम कर सकेंगीं. इसके लिए सरकार को फ़ैक्ट्रीज़ एक्ट, 1948 में संशोधन करना होगा. मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस क़ानून में संशोधन करने का फ़ैसला किया है. इस संशोधन के बाद महिलाएँ भी रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक की पाली में काम कर सकेंगी. सरकार का कहना है कि इससे स्पेशल इकॉनॉमिक ज़ोन और सूचना प्रोद्योगिकी के क्षेत्रों में काम कर रही महिलाओं को बहुत लाभ मिलेगा. मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री जयपाल रेड्डी ने कहा, "यदि संस्थान महिलाओं की सुरक्षा, काम के समान अवसर और देर रात घर लौटने के लिए वाहन आदि की व्यवस्था करता है तो महिलाएँ किसी भी समय काम कर सकेंगी." उन्होंने बताया कि राज्य सरकारों को अधिकार दे दिए गए हैं कि यदि राज्य के कारखाने या कोई भी संस्थान महिलाओं के लिए रात में काम करने के लिए समुचित प्रबंध हो वहाँ महिलाओं को रात सात बजे से सुबह छह बजे तक काम करने की अनुमति दी जा सकती है. जयपाल रेड्डी ने कहा कि क़ानून में परिवर्तन करते समय विभिन्न महिला संगठनों की मांगों और सुझावों को ध्यान में रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार समय समय पर अदालतों द्वारा दिए गए निर्देशों को भी क़ानून का हिस्सा बनाया जाएगा. |
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