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घरेलू हिंसा के ख़िलाफ़ क़ानून लागू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में गुरुवार से घरेलू हिंसा के ख़िलाफ़ क़ानून अमल में आ गया है जिसमें महिलाओं को दुर्व्यवहार से सुरक्षा प्रदान करने का प्रावधान है. इसके तहत पत्नी या फिर बिना विवाह किसी पुरुष के साथ रह रही महिला मारपीट, यौन शोषण, आर्थिक शोषण या फिर अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल की परिस्थिति में कार्रवाई कर सकेगी. इस क़ानून का उल्लंघन होने की स्थिति में जेल के साथ-साथ जुर्माना भी हो सकता है. महिला और बाल विकास मंत्रालय ने इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी है. इसी के साथ इस क़ानून को लागू करने के लिए ज़रूरी नियमों के बारे में भी अधिसूचना जारी कर दी गई है. महिला के ख़िलाफ़ होने वाली हिंसा के मुक़दमे लड़ने वाली वकील रेखा अग्रवाल ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "लोगों में आम धारणा है कि मामला अदालत में जाने के बाद महीनों लटका रहता है लेकिन अब नए क़ानून में मामला निबटाने की समय सीमा तय कर दी गई है." उन्होंने बताया कि अब मामले का फ़ैसला मैजिस्ट्रेट को साठ दिन के भीतर करना होगा. अब बात-बात पर महिलाओं पर अपना गुस्सा उतारने वाले पुरुष घरेलू हिंसा क़ानून के फंदे में फंस सकते हैं. इतना ही नहीं, लड़का न पैदा होने के लिए महिला को ताने देना, उसकी मर्जी के बिना उससे शारीरिक संबंध बनाना या लड़की के न चाहने के बावजूद उसे शादी के लिए बाध्य करने वाले पुरुषों पर भी इस क़ानून के दायरे में आ जाएंगे. इसके तहत दहेज की माँग की परिस्थिति में महिला या उसके रिश्तेदार भी कार्रवाई कर पाएँगे. व्यापक प्रावधान महिला और बाल विकास मंत्री रेणुका चौधरी का कहना है कि ये क़ानून महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाएगा क्योंकि केवल भारत में ही लगभग 70 प्रतिशत महिलाएँ किसी न किसी रूप में इसकी शिकार हैं. महत्वपूर्ण है कि इस क़ानून के तहत मारपीट के अलावा यौन दुर्व्यवहार और अश्लील चित्रों, फ़िल्मों के देखने पर मजबूर करना या फिर गाली देना या अपमान करना शामिल हैं. पत्नी को नौकरी छोड़ने पर मजबूर करना या फिर नौकरी करने से रोकना भी इस क़ानून के दायरे में आता है. इसके अंतर्गत पत्नी को पति के मकान या फ़्लैट में रहने का हक़ होगा फिर ये मकान या फ़्लैट उनके नाम पर हो या नहीं. |
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