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बेटियों को अधिकार देने पर प्रगति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिंदू परिवारों में पैतृक संपत्ति में बेटी को भी बेटे के समान हिस्सा दिए जाने संबंधी विधेयक संसद के ऊपरी सदन राज्यभा से पारित हो गया है. इस विधेयक को अब संसद के निचले सदन लोकसभा में रखा जाएगा. हिंदू उत्तराधिकार क़ानून के तहत महिलाओं को उत्तराधिकार देनेवाले विधेयक को राज्यसभा में क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने रखा. क़ानून मंत्री ने इस विधेयक को पुरूष और महिलाओं में भेदभाव को दूर करने की दिशा में एक क्रांतिकारी क़दम बताया. इस विधेयक में कहा गया है कि बेटियों को भी अपने पिता की संपत्ति में बेटे के समान ही हिस्सा मिलेगा. इसमें इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा कि बेटी की शादी हुई है कि नहीं. जिन संपत्तियों के मामले में ये क़ानून लागू होगा उनमें खेती लायक ज़मीन और पैतृक निवास भी शामिल होगा. लेकिन क़ानून मंत्री ने स्पष्ट किया कि अगर माता-पिता में से किसी एक ने अपनी ओर से वसीयत लिख दिया है तो ऐसी स्थिति में ये क़ानून लागू नहीं होगा. अभी भारत में जो हिंदू क़ानून हैं उनके अनुसार पैतृक संपत्ति का एकमात्र हक़दार बेटा होता है और बेटी को विरासत में से कुछ ही हिस्सा मिलता है. |
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