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कश्मीर में विवादित विधेयक नामंज़ूर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय कश्मीर की विधानसभा ने उस विवादित विधेयक को नामंज़ूर कर दिया है जिसमें राज्य से बाहर शादी करने वाली महिलाओं का स्थायी निवासी का दर्जा ख़त्म करने का प्रावधान था. स्थायी निवासी का दर्जा ख़त्म होने पर कोई भी लड़की जम्मू कश्मीर में कोई संपत्ति नहीं रख सकेगी और न ही उसे सरकारी नौकरी पाने का ही हक़ होगा. ऐसा इसलिए है क्योंकि जम्मू कश्मीर को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा प्राप्त है. विधेयक में कहा गया था कि राज्य से बाहर शादी करने वाली लड़की का वोट देने का अधिकार भी छिन जाएगा, हालाँकि पैतृक संपत्ति में उनकी हिस्सेदारी बची रहेगी. राज्य के बहुत से लोग ऐसा मानते हैं कि अगर शादी के बाद महिलाओं को राज्य की स्थायी निवासी का दर्जा दे दिया गया तो इससे कश्मीर के बाहर के लोग भी राज्य में संपत्ति ख़रीदने लगेंगे और इससे राज्य के विशेष दर्जे पर असर पड़ेगा. जम्मू-कश्मीर सरकार में शामिल काँग्रेस ने पहले तो इसका समर्थन किया था लेकिन बाद में विरोध में शामिल हो गई जबकि मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया. इस विधेयक का शुरू से ही विरोध हुआ था. ख़ासकर भारतीय जनता पार्टी और पैथर्स पार्टी ने पहले ही अपना रुख़ स्पष्ट कर दिया था. नेशनल कान्फ्रेंस ने पहले तो विधेयक का समर्थन किया था लेकिन बाद में विरोध में शामिल हो गई. उठा-पटक जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने पहले इस विधेयक को पास कर दिया था. लेकिन काँग्रेस पार्टी ने बाद में अपना रुख़ बदल लिया और ऊपरी सदन में इसका विरोध करने की घोषणा की.
तीन महीने के अंदर ऊपरी सदन में इस विधेयक पर मतदान नहीं हो पाया और इस कारण सरकार को नए सिरे से इस विधेयक को विधानसभा में पेश करना पड़ा. कश्मीर के आम लोगों के लिए स्थायी निवासी के दर्जे बड़ा है और विधेयक नामंज़ूर होने के बाद सत्ताधारी गठबंधन पर भी सवाल उठने लगे हैं. विधेयक नामंज़ूर हो जाने के बाद श्रीनगर के एक दूकानदार मंज़ूर अहमद ने कहा, "सत्ताधारी गठबंधन अब 'अपवित्र गठबंधन' बनकर रह गया है." काँग्रेस ने कहा कि यह विधेयक महिलाओं के ख़िलाफ़ है लेकिन पीडीपी विधायक और क़ानून मंत्री मुज़फ़्फ़र हुसैन बेग काँग्रेस से सहमत नहीं. हालाँकि विधेयक पर अलग-अलग सुर अलाप रहे काँग्रेस और पीडीपी ने गठबंधन के बारे में कुछ नहीं कहा है. 1927 में पहली बार कश्मीर के महाराजा ने स्थायी निवासी के दर्जे को लेकर क़ानून बनाया था. उसी समय से राज्य के बाहर शादी के बाद महिलाओं का स्थायी निवासी का दर्जा ख़त्म होता रहा है. लेकिन दो साल पहले उच्च न्यायलय ने कहा था कि इस क़ानून का ग़लत मतलब निकाला गया है. |
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