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आरक्षण के लिए सरकार विधेयक लाएगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आश्वासन दिया है कि सरकारी सहायता न लेने वाले निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण के लिए सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में एक विधेयक लाएगी. सरकार को यह क़दम सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को निष्प्रभावी करने के लिए उठाना पड़ रहा है जिसमें अब तक देश के सभी शिक्षण संस्थाओं में इन वर्गों के लोगों को आरक्षण देना पड़ता था. सरकार ने इस मसले पर 27 अगस्त को सभी राज्यों के शिक्षामंत्रियों की एक बैठक का फ़ैसला किया है और कहा है कि इस पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई जाएगी. इस फ़ैसले पर राज्यसभा में मंगलवार को हंगामा भी हुआ था और बुधवार को लोकसभा में इस पर चर्चा हुई और विधेयक लाने की मांग की गई. इसके बाद सरकार में शामिल दल डीएमके और वामपंथी दलों के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बुधवार को मुलाक़ात की थी. वामपंथी दलों के प्रतिनिधि मंडल में सीपीएम के सीताराम येचुरी, सीपीआई के एबी बर्धन और डी राजा, आरएसपी नेता अबनी रॉय और फॉर्वर्ड ब्लॉक के देबब्रत बिश्वास शामिल थे. इस प्रतिनिधिमंडल से एक घंटे की मुलाक़ात के बाद प्रधानमंत्री ने विधेयक लाने का आश्वासन दिया है. इस मुलाक़ात के बाद वामपंथी दलों के नेताओं ने बताया कि उनका मत है कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से शिक्षा का व्यावसायीकरण बढ़ेगा. उनका कहना था कि उन्होंने सरकार से कहा है कि वे इसका रास्ता निकालने के लिए समुचित क़दम उठाएँ और ज़रुरत हो तो एक अध्यादेश भी लेकर आएँ. वामपंथी नेताओं ने प्रधानमंत्री के अलावा यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गाँधी से भी मुलाक़ात की. |
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