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अलीगढ़ विश्वविद्यालय पर राजनीति तेज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में मुसलमानों को 50 फ़ीसदी आरक्षण देने के केंद्र सरकार के फ़ैसले पर राजनीति तेज़ हो गई है. भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले में राष्ट्रपति अब्दुल कलाम से हस्तक्षेप करके केंद्र सरकार पर इस निर्णय की वापसी के लिए दबाव डालने का अनुरोध किया है. दूसरी ओर मानव संसाधन मंत्री अर्जुन सिंह ने घोषणा कर दी है कि यह फ़ैसला उच्च शिक्षा संस्थानों को स्वायत्तता देने की नीति के तहत लिया गया है. उनका कहना था कि निर्धारित नियमों के तहत यदि कोई संस्थान अथवा विश्वविद्यालय कोई फ़ैसला लेता है तो वह सरकार को स्वीकार है. मानव संसाधन मंत्रालय ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक संस्थान मानते हुए प्रबंध परिषद के मुसलमानों के लिए 50 फ़ीसदी आरक्षण के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था. विरोध भाजपा प्रवक्ता मुख्तार अब्बास नक़वी ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पार्टी ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वह केंद्र सरकार पर इस फ़ैसले को वापस लेने के लिए दबाव डालें. नक़वी का कहना था कि केंद्र सरकार ने जल्दबाज़ी में यह फ़ैसला लिया है और यह मुसलमानों के हित में नहीं है. उनका कहना था कि ऐसे 'सांप्रदायिक फ़ैसलों' की जो प्रतिक्रिया होगी, वह देश और मुसलमानों के हित में नहीं होगी. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना सन् 1875 में सर सैयद अहमद ने की थी. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों में नामी हस्तियाँ रहीं हैं. इसमें फ़िल्म अभिनेत्री बेगम पारा, रेणुका देवी, गायक तलत महमूद, गीतकार शकील बदायूँनी, संवाद लेखक राही मासूम रज़ा, जावेद अख़्तर, अभिनेता रहमान और नसीरूद्दीन शाह जैसे नाम शामिल है. पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर ज़ाकिर हुसैन, कहानीकार सआदत हसन मंटो, इस्मत चुग़ताई, राजा राव, क्रिकेट खिलाड़ी सी.के. नायडू, लाला अमरनाथ और हॉकी खिलाड़ी और भारत के पूर्व कप्तान ज़फ़र इक़बाल भी इस विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं. |
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