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एएमयू में आरक्षण का विरोध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में मुसलमानों को 50 फ़ीसदी आरक्षण देने के केंद्र सरकार के फ़ैसले के विरोध में सड़कों पर आ गई है. भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने मंगलवार को दिल्ली के रामलीला मैदान पर एक प्रदर्शन का नेतृत्व किया. आडवाणी ने भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ऐलान किया कि भाजपा मुसलमानों के आरक्षण को बरदाश्त नहीं करेगी. उनका कहना था कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी को संविधान सभा के निर्णय को पढ़ना चाहिए. आडवाणी ने संविधान सभा के प्रमुख सरदार वल्लभ भाई पटेल का हवाला दिया और कहा कि देश का एक विभाजन हो चुका है और फिर से यह गलती नहीं होने दी जाएगी. वापसी का दबाव इसके पहले भाजपा ने राष्ट्रपति अब्दुल कलाम से हस्तक्षेप करके केंद्र सरकार पर इस निर्णय की वापसी के लिए दबाव डालने का अनुरोध किया था. दूसरी ओर मानव संसाधन मंत्री अर्जुन सिंह ने घोषणा कर दी है कि यह फ़ैसला उच्च शिक्षा संस्थानों को स्वायत्तता देने की नीति के तहत लिया गया है. उनका कहना था कि निर्धारित नियमों के तहत यदि कोई संस्थान अथवा विश्वविद्यालय कोई फ़ैसला लेता है तो वह सरकार को स्वीकार है. मानव संसाधन मंत्रालय ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक संस्थान मानते हुए प्रबंध परिषद के मुसलमानों के लिए 50 फ़ीसदी आरक्षण के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना सन् 1875 में सर सैयद अहमद ने की थी और इसके छात्रों में नामी हस्तियाँ शामिल रहीं हैं. |
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