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महिला आरक्षण पर सहमति की कोशिश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्र सरकार महिला आरक्षण विधेयक पर आम सहमति बनाने की कोशिश कर रही है. गृह मंत्री शिवराज पाटिल विभिन्न दलों के नेताओं के मुलाक़ात की है. नए प्रस्ताव में महिलाओं को समायोजित करने के लिए लोक सभा की सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव है ताकि मौजूदा व्यवस्था पर कोई असर न पड़े. इस बातचीत में सरकार की ओर गृह मंत्री शिवराज पाटिल, रक्षा मंत्री प्रणब मुखर्जी और संसदीय कार्य मंत्री गुलाम नबी आज़ाद मौजूद थे. भाजपा का नेतृत्व लालकृष्ण आडवाणी ने किया और उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार को पूरा सहयोग देने का वादा किया. भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने पत्रकारों को बताया कि भाजपा का प्रतिनिधिमंडल लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में मिला. इसमें विजय कुमार मल्होत्रा,प्रमोद महाजन और सुषमा स्वराज शामिल थीं. सुषमा स्वराज ने कहा कि भाजपा ने सरकार को साफ़ कर दिया है कि महिला आरक्षण विधेयक जिस किसी भी स्वरूप में लाया जाएगा, पार्टी उसका समर्थन करेगी. भाजपा के अलावा सीपीएम, सीपीआई, तेलुगू देशम और तेलंगाना राष्ट्र समिति के नेताओं से बातचीत की गई है. वामपंथी नेताओं ने इस प्रस्ताव पर विचार करने को कहा है. ख़बरों के अनुसार लोक सभा की सीटें 545 से बढ़ाकर 900 और राज्यसभा की सीटें भी बढ़ाए जाने का प्रस्ताव है. विधानसभा और विधानपरिषदों की सीटें भी बढ़ाए जाने की योजना है. साथ में प्रस्ताव में 33 प्रतिशत आरक्षण का भी व्यवस्था है. असफल प्रयास इसके पहले संसद में महिला आरक्षण विधेयक कई बार रखने की कोशिश की गई लेकिन भारी विरोध के कारण इसे टालना पड़ा. कांग्रेस, भाजपा और वामपंथी दल इस विधेयक के समर्थन में रहे हैं. लेकिन समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल इस आधार पर इसका विरोध करते रहे हैं कि इसमें पिछड़ी जाति की महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था नहीं थी. महिला आरक्षण विधेयक में संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित किए जाने की व्यवस्था है. महिला आरक्षण विधेयक एक संविधान संशोधन विधेयक है और इसलिए इसे दो तिहाई बहुमत से पारित किया जाना ज़रूरी है. इस पर मतदान के दौरान सदस्यों की कुल संख्या के आधे की उपस्थिति अनिवार्य है. |
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