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आंध्र प्रदेश में मुसलमानों के लिए आरक्षण | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आंध्र पदेश सरकार ने शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मुसलमानों के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. आंध्र प्रदेश राज्य के पिछडे वर्ग के मामलों के आयोग ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है जिससे मुसलमानों के लिए आरक्षण संबधी नियम बनाने का रास्ता साफ़ हो गया है. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाय एस राजशेखर रेड्डी ने कहा है कि उनकी सरकार मुसलमानों को पिछड़े वर्ग की सूची में शामिल करके आरक्षण का लाभ उन तक पहुंचाने के प्रति हमेशा कटिबद्ध रही है. पिछडे वर्ग के मामलों के आयोग के अध्यक्ष न्यायधीश डी सुब्रमणियम ने कहा कि आयोग ने पूरे राज्य में कई लोगों से बात की और आर्थिक, सामाजिक और शिक्षा के क्षेत्र में मुसलमानों की स्थिति का आकलन करने के बाद यह रिपोर्ट तैयार की है. मगर न्यायधीश डी सुब्रमणियम ने रिपोर्ट के बारे और कुछ बताने से यह कह कर इनकार कर दिया कि सरकार इसे प्रकाशित कर सकती है. न्यायधीश डी सुब्रमणियम ने यह ज़रूर कहा कि इस वर्ष जुलाई से आरंभ होने वाले शिक्षा सत्र से ही मुसलमान छात्रों के लिए सरकार शिक्षा संस्थानों में आरक्षण लागू हो जाएगा. वादा और विरोध 2004 में राज्य में विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस ने वादा किया था कि अगर वो सत्ता में आती है तो मुसलमानों के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाएगा. सत्ता में आने के बाद कांग्रेस सरकार ने जुलाई में मुसलमानों के लिए आरक्षण लागू करने के आदेश भी दे दिए. मगर दक्षिण पंथी हिंदू गुट विश्व हिंदू परिषद और अन्य दलों ने अदालत में सरकारी आदेश को यह कह कर चुनौति दी कि इसका कोई क़ानूनी आधार नहीं है. अदालत ने सरकारी आदेश को यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया कि इसके लिए किसी स्वतंत्र आयोग से विचार विमर्श नही किया गया था. अदालत ने सरकार को कहा था कि वो इस मामले में एक आयोग का गठन करे और उसकी सिफ़ारिशों के आधार पर कोई फ़ैसला करे. |
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