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आदर्श निकाहनामे को मंज़ूरी
एक मुस्लिम लड़की की शादी
मुस्लिम शादी एक अनुबंध होता है
भारत में मुसलमानों के सर्वोच्च प्रतिनिधि संस्था मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक नए आदर्श निकाहनामे के प्रारूप को मंजूरी दे दी है.

आदर्श निकाहनामे में व्यवस्था की गई है कि शौहर एक ही मौक़े पर तीन बार तलाक़ शब्द कहकर अपनी बीवी से रिश्ता ख़त्म नहीं कर सकता.

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी की लखनऊ में शनिवार को एक बैठक हुई जिसमें नए निकाहनामे को मंज़ूरी दे दी गई.

बोर्ड के प्रवक्ता अब्दुल रहीम क़ुरैशी ने पत्रकारों को बताया कि इस निकाहनामे को अंतिम मंज़ूरी के लिए बोर्ड की महासभा में रखा जाएगा जिसकी तारीख़ बाद में तय की जाएगी.

नया निकाहनामा लंबे विचारविमर्श और बहस-मुबाहिसे के बाद तैयार किया गया है और इसमें कहा गया है कि तीन बार तलाक कहकर रिश्ता तोड़ना एक गुनाय यानी अपराध है.

तीन भाग

क़ुरैशी ने बताया कि नया निकाहनामे के तीन भाग होंगे. पहले में शादी यानी निकाह की शर्तें हैं. दूसरे भाग में मियाँ और बीवी के अधिकार और कर्तव्य बयान हैं जिन्हें शरियत के मुताबिक़ निर्धारित किया गया है.

तीसरे भाग में एक घोषणा पत्र पर दस्तख़त करने होंगे जिसमें यह व्यवस्था है कि अगर मियाँ-बीवी के बीच कोई अनबन या झगड़ा होता है तो उसे किस तरह सुलझाया जाए.

मुस्लिम महिलाएँ
तलाक से अक्सर औरतें ही प्रभावित होती हैं

नए निकाहनामे में कहा गया है कि मियाँ-बीवी को क़ुरआन में बताए रास्ते को अपनाना होगा यानी परिवार के बुज़ुर्गों से सलाह-मश्वरा करना होगा.

अगर वहाँ बात नहीं बने तो मौलवियों या इस्लामी अदालतों के ज़रिए झगड़ा निबटाने की कोशिश करनी होगी.

अगर ये तमाम उपाय भी बेअसर साबित होते हैं तो शौहर अपनी बीवी को तीन अलग-अलग मौक़ों पर तलाक का शब्द कहकर रिश्ता तोड़ सकता है लेकिन इन तीनों मौक़ों में अंतराल होना चाहिए यानी ये सिर्फ़ एक बार में नहीं कहे जा सकते.

बोर्ड के प्रवक्ता क़ुरैशी ने कहा है कि मुसलमानों को इस बारे में जागरूक बनाने के लिए एक अभियान चलाया जाएगा. हालाँकि क़ुरैशी ने कहा कि इस आदर्श निकाहनामे को ज़बरदस्ती लागू नहीं किया जाएगा.

कुछ मुस्लिम समुदायों का मानना है कि तलाक शब्द कहकर रिश्ता तोड़ने की इजाज़त शरियत में दी गई है, अलबत्ता इसे एक अच्छा विकल्प नहीं माना जाता है.

एक ही समय में तीन बार तलाक कहकर रिश्ता तोड़ने के चलन की कुछ मुस्लिम समुदाय आलोचना करते रहे हैं जिस फलस्वरूप मुस्लिम समुदाय में व्यापक सुधार की माँग भी की गई है.

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