BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मित्र को भेजेंकहानी छापें
सामूहिक विवाहों का बढ़ता चलन

दुल्हनें
सामूहिक विवाह के लिए बैठी दुल्हनें
भारत के मुस्लिम समाज में इज्तिमाई यानी सामूहिक विवाहों का प्रचलन बढ़ रहा है क्योंकि बहुत कम ख़र्च में अभिभावक अपनी बेटियों का विवाह करके चिंतामुक्त हो जाते हैं.

जयपुर में बुधवार को मुसलमानों की रंगरेज़ बिरादरी के सामूहिक विवाह समारोह में एक सौ नई जोड़ियाँ बनीं.

नवविवाहितों को आशीर्वाद देने वालों में राजस्थान के राज्यपाल मदनलाल खुराना और राज्य की भाजपा सरकार के एकमात्र मुस्लिम मंत्री युनूस ख़ान भी शामिल थे.

शादी का ख़र्च भी इतना कम कि यक़ीन करना मुश्किल है, सिर्फ़ 2100 रूपए प्रति दुल्हन.

इतने कम ख़र्च में सभी ज़रूरी चीज़ें मुहैया कराई गईं जिनमें दुल्हन की चाँदी की पायल भी शामिल है.

 ऐसी शादियाँ समाज सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण क़दम हैं क्योंकि इससे माँ-बाप पर अनावश्यक बोझ नहीं पड़ता
एक दुल्हन

पूरे माहौल में शादी की अफ़रा-तफ़री ज़रूर थी लेकिन न तो बैंड-बाजों का शोर, न ही शानो-शौक़त का दिखावा, अमीर-ग़रीब का कोई फ़र्क नज़र नहीं आया.

एक और ख़ास बात ये थी कि जोड़े सिर्फ़ राजस्थान के नहीं थे बल्कि देश भर से जयपुर पहुँचे थे.

महाराष्ट्र से आईं दुल्हन शबाना ने कहा, "ऐसी शादियाँ समाज सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण क़दम हैं क्योंकि इससे माँ-बाप पर अनावश्यक बोझ नहीं पड़ता."

महाराष्ट्र के ही वर्धा से आए अब्दुल सत्तार अपनी बेटी की शादी करके चिंतामुक्त नज़र आए. उन्होंने कहा, "यही शादी मैं अपने घर पर करता तो कम से कम एक लाख रूपए ख़र्च हो जाते और यहाँ कुछ ही हज़ार में काम बन गया."

राष्ट्रीय रंगरेज़ समाज के अध्यक्ष हाजी उम्मेद बख्श कहते हैं कि ऐसी शादियाँ इस्लामी मान्यता के अनुरूप हैं.

बदलाव

हाजी उम्मेद बख़्श बताते हैं कि 1982 में जब पहली बार इस तरह की शादी का आयोजन किया गया तो अच्छी प्रतिक्रिया नहीं हुई थी.

दुल्हे
शादी बहुत सस्ते में संपन्न हो गई

लेकिन अब सिर्फ़ रंगरेज़ समाज ही नहीं, बाक़ी मुस्लिम बिरादरियों में भी सामूहिक विवाह का चलन बढ़ रहा है.

अब तक रंगरेज़ समाज सौ से अधिक बार सामूहिक विवाह का आयोजन कर चुका है और इसमें शामिल होने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है.

राजस्थान के खेल मंत्री युनूस ख़ान ने कहा कि उनकी सरकार ऐसे सामूहिक विवाहों को प्रोत्साहन देगी क्योंकि "इससे दहेज जैसी बुराई का अंत करने में मदद मिलती है."

इस शादी में हज़ारों की तादाद में लोग मौजूद थे और जैसा कि साईं टोंक से आईं शगुफ़्ता बानो ने कहा, "यहाँ सबसे अच्छी बात ये है कि अमीर गरीब का कोई भेद नहीं है."

शायद यही वजह है कि ऐसी शादियाँ तेज़ी से लोकप्रिय होती जा रही हैं.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>