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मुस्लिम संगठनों ने रोष व्यक्त किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंग्लैंड के चीफ़ इंस्पेक्टर ऑफ़ स्कूल डेविड बेल ने कहा है कि देश के मुसलिम स्कूलों में जो शिक्षा दी जा रही है वो ब्रितानी समाज के नियमों के अनुसार नहीं हैं और वहाँ पढ़ने वाले बच्चे अन्य संप्रदायों का सम्मान करना भी सिखाया जाना चाहिए. मुसलिम गुटों ने इस वक्तव्य पर आक्रामक प्रतिक्रिया दी है. ब्रिटेन में धर्म के नाम पर चलने वाले हज़ारों स्कूल हैं, ज़्यादातार ईसाई हैं और कुछ इस्लामिक हैं. लेकिन शैक्षिक मानकों को तय करने वाली संस्था औफ़्सटेड के प्रमुख डेविड बेल ने उँगली उठाई है उन मज़हबी स्कूलों पर जो बिना सरकारी सहायता के चलते हैं. उन्होंने सोमावार को अपने एक भाषण में कहा कि ऐसे स्कूल विद्यार्थियों को अन्य संपद्रायों के लिए सम्मान और सहिष्णुता नहीं सिखा रहे. “यह बिल्कुल ठीक है कि माता पिता को अपने बच्चों के लिए धर्म पर आधारित शिक्षा चुनने का अधिकार होना चाहिए, लेकिन यह भी सही है कि हम उम्मीद करते हैं कि इन बच्चों को ब्रिटेन के समाज में जगह लेने के लिए तैयार किया जाए. और कुछ मुसलिम स्कूलों में ऐसा नहीं हो रहा है.” ब्रिटेन में मुस्लिम स्कूलों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोत्तरी हुई है. दस साल पहले 30 ऐसे स्कूल थे, अब 120 हो गए हैं. लेकिन वहाँ पढ़ने वाले बच्चे कुल मुसलिम जनसंख्या के तीन प्रतिशत ही हैं. 100 ईसाई स्कूल और 50 यहूदी स्कूल भी हैं. लेकिन केवल मुसलिम स्कूलों को ही निशाना बनाए जाने पर मुसलमान नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है. ब्रिटेन में काउंसिल ऑफ़ इंडियन मुसलिम्स के ग़ज़ाली ख़ान का कहना है कि ईसाई और यहूदी स्कूलों के लिए ऐसी ही बात क्यों नहीं कही जाती.
मुसलिम काउंसिल ऑफ़ ब्रिटेन की शिक्षा समिति के अध्यक्ष ताहिर आलम ने भी इस बात पर रोष प्रकट किया है और कहा कि डेविड बेल का यह कथन तथ्यों पर आधारित नहीं है. लेकिन उन्होंने यह माना कि कुछ स्कूल शायद सभी मानदंड पूरे न कर रहे हों. आलम ने कहा, “हालाँकि कुछ ऐसे स्कूल हो सकते हैं जो मानदंडों को पूरा न कर रहे हो और नागरिकता के बारे में पूरी जानकारी न दे रहे हों. लेकिन यह कहना कि इसके चलते हमारे देश के साथ जुड़े रहने में ख़तरा है, ग़ैर ज़िम्मेदाराना है और किसी भी तरह से उचित नहीं है.” मुस्लिम स्कूलों पर यह विवाद यहाँ की राजनीति के एक संवेदनशील समय पर उठा है जब धर्म से जुड़े विषयों की चर्चा में संप्रदाय विशेष आसानी से आहत हो सकते हैं. ख़ासकर कि ग्यारह सितंबर के हमलों के बाद कई मुसलमानों को लगता रहा है कि उनकी वफ़ादारी पर संदेह किया जा रहा है. |
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