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महिला आरक्षण पर यूपीए में ही मतभेद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने के मुद्दे पर सत्तारुढ़ यूपीए के दलों और इसको समर्थन दे रहे दलों में ही मतभेद दिखाई दे रहा है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस मसले पर आमराय बनाने के लिए केंद्र में सत्तारुढ़ गठबंधन यूपीए में शामिल दलों और सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे दलों की एक बैठक बुलाई थी. महिलाओं को आरक्षण देने के लिए विधेयक लाने के प्रयास पिछले एक दशक से चल रहे हैं लेकिन इस दिशा में कोई आमराय नहीं बन पाई है. इसे लोकसभा में दो बार पेश किया गया लेकिन दोनों ही बार ये कालातीत हो गया. हालांकि केंद्र की हर सरकार कहती आई है कि वह महिलाओं को आरक्षण देना चाहती है. मतभेद समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को आरक्षण का विरोध करने वाले नेता के रुप में देखा जाता है. उन्होंने इस बैठक के बाद कहा है कि उनकी पार्टी को 33 प्रतिशत की जगह 10 प्रतिशत आरक्षण मंज़ूर है और वह भी राजनीतिक दलों पर छोड़ दिया जाए कि वे 10 प्रतिशत टिकटें महिलाओं को देना सुनिश्चित करें. उल्लेखनीय है कि पहले एक ऐसा प्रस्ताव आ चुका है कि चुनाव आयोग की यह सुनिश्चित करे कि पार्टियाँ महिलाओं को 33 प्रतिशत टिकटें दे. उन्होंने कहा, "यदि वर्तमान स्थिति के अनुसार 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी जाती हैं तो अनुसूचित जाति-जनजाति के 22 प्रतिशत को मिलाकर 55 प्रतिशत सीटें आरक्षित हो जाएंगी तो पिछड़े वर्ग और अन्य लोगों के लिए सिर्फ़ 45 प्रतिशत सीटें बच जाएँगी." कुछ इसी तरह की राय राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव की थी जिन्होंने कहा कि उन्हें भी 10 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है. लालू प्रसाद यादव ने कहा, "हम 33 प्रतिशत आरक्षण के ख़िलाफ़ नहीं हैं अगर इसमें मुस्लिम और पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण के भीतर आरक्षण का प्रावधान किया जा सके वरना हम चाहेंगे कि इसे 10 प्रतिशत कर दिया जाए." वामपंथी दलों ने साफ़ कहा है कि वे हर हाल में महिलाओं को आरक्षण दिए जाने के पक्षधर हैं और सरकार चाहे जिस रुप में यह विधेयक संसद में रखती है वे इसका समर्थन करेंगे. जबकि सरकार को बाहर से समर्थन दे रही पार्टी बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने कहा कि वे महिलाओं को आरक्षण दिए जाने के पक्ष में हैं लेकिन अनुसूचित जाति और जनजाति तथा धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए अलग से आरक्षण का प्रावधान किया जाना चाहिए. लोकजनशक्ति पार्टी के रामविलास पासवान ने कहा, "अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए संविधान के तहत अलग से आरक्षण हो जाता है तो अच्छा है वरना सीधे 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया जाना चाहिए." भाजपा प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी पहले ही महिला आरक्षण विधेयक पर अपनी सहमति दे चुकी है.
भाजपा ने फिर दोहराया है कि वह इस विधेयक को समर्थन देने को तैयार है और अब यह सरकार पर है कि वह पहले गठबंधन के बीच आमराय बनाए. हालांकि भाजपा के भीतर भी ऐसा नहीं है कि सब कुछ ठीक हो क्योंकि पार्टी की एक प्रमुख नेता उमा भारती ने मौजूदा स्वरुप में महिला आरक्षण विधेयक का विरोध किया है. उमा भारती ने कहा है कि वे पिछले आठ साल से इस विषय पर चर्चा की मांग कर रही हैं. उन्होंने एक बार फिर कहा है कि अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए अलग से आरक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए. आमराय की समस्या उल्लेखनीय है कि महिला आरक्षण विधेयक पर पिछले कई वर्षों से सहमति बनाने के प्रयास चल रहे हैं लेकिन किसी भी सरकार को इसमें सफलता नहीं मिली है. वैसे तो मूल विधेयक में महिलाओं को मौजूदा 545 सीटों में से 33 फीसदी सीटों पर आरक्षण देने का प्रावधान है. लेकिन कांग्रेस की ओर से एक नया प्रस्ताव रखा गया है जिसमें लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 900 करने का प्रस्ताव है जिससे कि बढ़ी हुई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकें. वैसे राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जो पार्टियाँ 33 प्रतिशत आरक्षण का खुला समर्थन कर रही हैं उन पार्टियों के भीतर भी एकमत है यह कहना अभी मुश्किल है. |
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