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रविवार, 21 अगस्त, 2005 को 10:35 GMT तक के समाचार
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आरक्षण ख़त्म करने के ख़िलाफ़ प्रदर्शन
फ़ैसले के ख़िलाफ़ प्रदर्शन
निजी संस्थानों के बारे में सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले का विरोध बड़े पैमाने पर हुआ है
निजी शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण ख़त्म करने के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ रविवार को दिल्ली में एक प्रदर्शन रैली हुई.

अनुसूचित जाति और जनजाति परिसंघ की इस रैली में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

इस प्रदर्शन में एनडीए के घटक दलों से लेकर वामपंथी दलों के नेता जिस तरह इकट्ठे हुए उसने एक बार फिर ज़ाहिर किया कि इस मामले में देश में एक राजनीतिक सहमति है.

इसमें माँग की गई कि सरकार एक क़ानून बनाकर आरक्षण को फिर से लागू करे.

हालाँकि इस मसले ने सरकार की नीतियों पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.

प्रदर्शन

उल्लेखनीय है कि पिछले हफ़्ते सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फ़ैसले में निजी शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण की व्यवस्था ख़त्म कर दी थी.

रैली में शरद यादव
इस मसले पर ज़्यादातर राजनीतिक दलों में आपसी सहमति दिखती है

यह फ़ैसला उच्च शिक्षा वाले उन संस्थानों पर लागू होना है जो सरकारी अनुदान नहीं लेते.

अनुसूचित जाति और जनजाति परिसंघ ने दिल्ली के जंतर मंतर पर इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.

प्रदर्शन में मार्क्सवादी पार्टी के नीलोत्पल बसु ने कहा कि इस मामले पर राज्यसभा और लोकसभा में सर्वसम्मति है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ एक क़ानून लाया जाए.

उन्होंने बताया कि वामपंथी दलों ने इस मसले पर प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की थी और उन्होंने आश्वासन दिया है कि सरकार इस मसले पर एक विधेयक लेकर आएगी.

प्रदर्शन में लोगों की राय थी कि निजी शिक्षण संस्थान मुनाफ़ाख़ोरी में लगे हुए हैं.

प्रदर्शन में सीपीआई के डी राजा और जनता दल (यू) के शरद यादव के अलावा परिसंघ के अध्यक्ष उदित राज मौजूद थे.

बहस

सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले ने देश में एक नई बहस भी छेड़ दी है.

एक पक्ष ऐसा है कि जिसका कहना है कि सरकारें यह बात करती रही हैं कि शिक्षा के लिए बजट का 6 प्रतिशत खर्च होना चाहिए लेकिन अब तक इसकी नाम मात्र की राशि ही शिक्षा पर खर्च होती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी शिक्षा पर तो सरकार 0.1 प्रतिशत ही खर्च करती है.

ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का समर्थन करने वालों का कहना है कि यदि सरकार ख़ुद शिक्षा पर ख़र्च नहीं कर रही है तो उसे क्या अधिकार है कि वह आरक्षण का सरकारी कोटा उन शिक्षण संस्थानों पर थोपे जो ख़ुद इसके लिए पैसा जुटा रहे हैं.

सरकार ने इस मुद्दे पर बातचीत के लिए 23 अगस्त को सर्वदलीय बैठक बुला रखी है और 27 अगस्त को सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों की बैठक भी इसी मुद्दे पर होनी है.

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