BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
सोमवार, 09 अक्तूबर, 2006 को 12:22 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
दलित नेता कांशीराम का अंतिम संस्कार
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कांशीराम को श्रद्धांजलि दी
बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक और दलित राजनीति को नई दिशा देने वाले नेता कांशीराम का अंतिम संस्कार सोमवार को दिल्ली में कर दिया गया.

72 वर्षीय कांशीराम लगभग दो वर्ष से गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे और रविवार की देर रात उनका निधन हो गया.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह, राष्ट्रीय जनता दल नेता लालू प्रसाद यादव और लोकजनशक्ति पार्टी के रामविलास पासवान उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में शामिल थे.

बाबा साहब अंबेडकर के बाद दलित चेतना के सबसे बड़े अगुआ रहे कांशीराम की राजनीतिक उत्तराधिकारी और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने बताया है कि उनके अंतिम संस्कार के बाद उनकी अस्थियों को नदी में विसर्जित नहीं किया जाएगा बल्कि उसे बहुजन समाज पार्टी के मुख्यालय में दिल्ली में रखा जाएगा.

कांशीराम का सफ़र
पंजाब में 1934 में जन्म
विज्ञान के स्नातक
रक्षा विभाग में नौकरी
बामसेफ़ और बीएसपी के संस्थापक
धर्मपरिवर्तन करके बौद्ध बने
इटावा और होशियारपुर से सांसद रहे
वर्ष 2003 से लकवाग्रस्त

पंजाब के रोपड़ ज़िले में 15 मार्च, 1934 को जन्मे कांशीराम ने दलितों को एकजुट करके उन्हें राजनीतिक ताक़त बनाने का अभियान 1970 के दशक में शुरू किया, कई वर्षों के कठिन परिश्रम और प्रभावशाली संगठन क्षमता का परिचय देते हुए उन्होंने बहुजन समाज पार्टी को सत्ता के गलियारों तक पहुँचा दिया.

विज्ञान स्नातक कांशीराम ने दलित राजनीति की शुरूआत बामसेफ़ नाम के अपने कर्मचारी संगठन के ज़रिए की, उन्होंने दलित कामगारों को एक सूत्र में बाँधा और उनके निर्विवाद रूप से उनके सबसे बड़े नेता रहे.

पुणे में डिफेंस प्रोडक्शन डिपार्टमेंट में साइंटिफ़िक असिस्टेंट के तौर पर काम कर चुके कांशीराम ने नौकरी छोड़कर दलित राजनीति का बीड़ा उठाया.

बामसेफ़ के बाद उन्होंने दलित-शोषित मंच डीएस-फोर का गठन 1980 के दशक में किया और 1984 में बहुजन समाज पार्टी बनाकर चुनावी राजनीति में उतरे.

1990 के दशक तक आते-आते बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में निर्णायक भूमिका हासिल कर ली.

कांशीराम ने हमेशा खुलकर कहा कि उनकी पार्टी सत्ता की राजनीति करती है और उसे किसी भी तरह से सत्ता में आना चाहिए क्योंकि यह दलितों के आत्मसम्मान और आत्मबल के लिए ज़रूरी है.

नई ताक़त

बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश में बार-बार राजनीतिक समीकरण बनाए और बिगाड़े, पहले मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाई और उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के साथ.

उत्तर प्रदेश में पार्टी की ताक़त इतनी बढ़ी कि उसे साथ लिए बिना सरकार बना पाना किसी राजनीतिक दल के लिए बहुत ही कठिन हो गया.

कांशीराम वर्ष 2003 में लकवाग्रस्त हो गए थे और उसके बाद से वे सक्रिय राजनीति से दूर होते चले गए और पार्टी की कमान पूरी तरह से मायावती को सौंप दी, हालाँकि वे 2001 में ही घोषणा कर चुके थे कि मायावती ही उनकी उत्तराधिकारी होंगी.

कांशीराम 1991 में उत्तर प्रदेश में इटावा से और 1996 में पंजाब में होशियारपुर से सांसद रह चुके हैं.

कांशीराम अविवाहित थे. उनकी बीमारी के दिनों में भी विवाद ने उनका साथ नहीं छोड़ा, कांशीराम की बहन और भतीजे ने आरोप लगाया कि उन्हें मायावती ने बंधक बना रखा है.

मामला अदालत तक गया और अदालत ने मायावती के पक्ष में फ़ैसला सुनाया लेकिन आरोप लगते रहे कि कांशीराम की देखभाल ठीक से नहीं हो रही है जिसका खंडन मायावती करती रहीं.

इससे जुड़ी ख़बरें
यूपी में चुनावी सरगर्मी तेज़ हुई
14 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस
मुलायम ने विश्वास मत हासिल किया
28 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस
स्टिंग ऑपरेशन के बाद विधायक निलंबित
15 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस
स्पीकर ने बसपा की याचिका रद्द की
07 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>