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शुक्रवार, 14 जुलाई, 2006 को 23:15 GMT तक के समाचार
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यूपी में चुनावी सरगर्मी तेज़ हुई

मुलायम सिंह
मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने भी चुनाव के लिए कमर कस ली है
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियाँ शुरू कर दी हैं.

ख़बर है कि बहुजन समाज पार्टी ने तो आधी से अधिक सीटों पर अपने उम्मीदवार तय कर दिए हैं. जबकि सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी ने भी कार्यकारिणी करके चुनाव के लिए कमर कस ली है.

संयोग की बात है कि गुरुवार को जिस समय मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव पार्टी कार्यालय में समाजवादी पार्टी की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रहे थे.

उसी समय पूर्व मुख्यमंत्री मायावती पार्टी कार्यालय में अपने सांसदों, विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों की बैठक कर रही थीं.

सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी अपनी सरकार के कामों को आधार बनाकर दोबारा सत्ता में लौटने की तैयारी कर रही है.

उधर, बहुजन समाज पार्टी दूसरे दल के जिताऊ नेताओं को पार्टी में शामिल करके मुलायम सिंह यादव का किला ढहाने की रणनीति बना रही हैं.

आधार बढ़ाने की कोशिश

पिछले डेढ़ साल से मायावती अपनी पार्टी का सामाजिक आधार बढ़ाने के लिए ब्राह्मण और दूसरी सवर्ण जातियों के नेताओं को अपनी तरफ खींचने में लगी हैं.

मायावती
मायावती अपना जातीय आधार बढ़ाने की कोशिश में लगी हैं

मायावती की अध्यक्षता में चल रही बैठक की रौनक उस समय और बढ़ गई जब राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त वैकल्पिक ऊर्जा विकास संस्थान के अध्यक्ष महेश त्रिवेदी पद से इस्तीफ़ा देकर वहाँ पहुँच गए.

मायावती ने बैठक में ही उन्हें टिकट देने की घोषणा कर दी. पार्टी सूत्रों के अनुसार मायावती ने ज़िलेवार समीक्षा करते हुए 200 से ज़्यादा लोगों को टिकट के आश्वासन दे दिए हैं.

इनमें इलाहाबाद के पूर्व मंत्री राकेशधर त्रिपाठी, मऊ से पूर्व मंत्री फागू चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री वीरबहादुर सिंह के बेटे फतेहबहादुर सिंह शामिल हैं.

मायावती ने पार्टी नेताओं को यह कहते विदा किया कि वे विधानसभा के पहले शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों की तैयारी करें.

सरकार ने शहरी निकायों के चुनाव सितंबर में कराने की घोषणा मजबूरी में कर दी है.

हालांकि समाजवादी पार्टी नहीं चाहती कि विधानसभा चुनावों से पहले शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव हों.

शहरों में समाजवादी पार्टी का आधार कमज़ोर माना जाता है और स्थानीय निकायों के चुनावों में सफलता न मिलने का असर विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है.

ग़ौरतलब है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल मई, 2007 तक है लेकिन चुनाव उससे पहले होने की संभावना है.

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