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'मैं कभी भी ब्राह्मण-विरोधी नहीं थी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर भारत की दलित राजनीति में एक अहम घटना गुरुवार को उस समय घटी जब पिछड़ी जातियों के जनाधार वाली बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक ब्राह्मण रैली का आयोजन किया. रैली को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी ब्राह्मणों सहित तमाम दूसरी बड़ी जातियों के हितों की रक्षा करेगी. मायावती का यह नया राजनीतिक पैंतरा देश के सबसे ज़्यादा जनसंख्या वाले प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर में निर्णायक परिवर्तन ला सकता है. दो दशकों पहले सामने आए इस राजनीतिक दल ने हमेशा ही तथाकथित ब्राह्मणवादी और जातीय असमानता वाले सामाजिक ढांचे का विरोध किया है. एक दौर था जब बसपा के मंचों से सुनने को मिलता था कि पार्टी को अपनी राजनीति के लिए ब्राह्मणों और दूसरी ऊँची जाति के समर्थन की आवश्यकता नहीं है. कैसी करवट लेकिन प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित इस रैली ने पूरी तस्वीर को बदलकर रख दिया है.
रैली में आए केसरिया बाने में लिपटे ब्राह्मणों ने शंख बजाकर और हर-हर महादेव का नारा लगाकर मायावती और उनकी पार्टी को अपना समर्थन व्यक्त किया. कुछ लोग सभा में त्रिशूल लेकर भी पहुँचे. लगभग 40 हज़ार की भीड़ वाली इस रैली में मायावती ने कहा कि वो कभी भी ब्राह्मणों या अन्य उच्च जातियों की विरोधी नहीं थीं. मायावती तीन बार प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी है. उनपर उच्चवर्ग के लोगों द्वारा यह आरोप लगाया जाता रहा है कि उनके शासनकाल में सरकार द्वारा उनका शोषण किया गया है. मायावती ने कहा कि अगर उच्च जातियाँ उनकी फिर से सत्ता में आने में मदद करती हैं तो वो उनके हितों की रक्षा करेंगी. उन्होंने कहा, "मैं हिंदूधर्म के ख़िलाफ़ नहीं हूँ लेकिन मैं मनुवाद और ग़ैरबराबरी के सिद्धांत पर आधारित समाज को बदलना चाहती हूँ." समीकरण उन्होंने यह भी कहा कि हिस्सेदारी और संख्या के आधार पर आगामी चुनावों में उनकी पार्टी ब्राह्मणों और अन्य जातियों के लोगों को चुनाव लड़ने के लिए टिकट भी देंगी. यह पहली बार था जब बसपा के महासचिव सतीश मिश्र, जो कि ब्राह्मण हैं, के चित्र को रैली के लिए तैयार किए गए कट-आउटों पर भीमराव अंबेडकर, बसपा संस्थापक काशीराम और मायावती के चित्रों के साथ दिखाया गया था. रैली को संबोधित करते हुए महासचिव सतीश मिश्र ने दलित जातियों को आश्वासन दिया कि वो और पार्टी के अन्य ब्राह्मण नेता सभी लोगों के बराबर होने पर विश्वास करते हैं और जाति के आधार पर सामाजिक बँटवारे से सहमत नहीं हैं. रैली के मंच से बसपा नेताओं ने कहा कि प्रदेश के दो अन्य दल, भाजपा और कांग्रेस इतने कमज़ोर हो चुके हैं कि वो उच्च जातियों के हितो की रक्षा नहीं कर सकते हैं. प्रदेश की कुल जनसंख्या में ब्राह्मणों की तादाद आठ प्रतिशत है और मायावती का मानना है कि बसपा यदि उच्चवर्गों का तीन प्रतिशत वोट भी हासिल कर लेती है तो उसे प्रदेश में सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत मिल जाएगा. विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रदेश की वर्तमान राजनीति में मायावती के लिए ऐसा करना ज़रूरी हो गया है. जानकार यह भी मानते हैं कि इस समय वही ब्राह्मण बसपा से जुड़ रहे हैं, जो मायावती के समर्थन से चुनाव जीतना चाहते हैं. |
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