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स्पीकर ने बसपा की याचिका रद्द की | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष ने बहुजन समाज पार्टी विधानमंडल दल के नेता स्वामीप्रसाद मौर्य की याचिका रद्द कर दी है. इसमें उन्होंने बसपा के 13 विधायकों की सदस्यता समाजवादी पार्टी में शामिल होने के कारण रद्द करने की माँग की थी. विधानसभा अध्यक्ष माताप्रसाद पांडे ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन बुलाया और यह जानकारी दी. उसके बाद विधानसभा अध्यक्ष राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की बैठक में हिस्सा लेने फ़ीजी रवाना हो गए. पत्रकारों से विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष केसरीनाथ त्रिपाठी ने बसपा के 37 बाग़ी विधायकों को एक तिहाई होने के आधार पर अलग दल के रूप में मान्यता दे दी थी. उनका कहना था कि इस आधार पर ये लोग दलबदल क़ानून की परिधि में नहीं आते. इस आधार पर इन सदस्यों की सदस्यता रद्द नहीं की जा सकती है. हाईकोर्ट में मामला दूसरी ओर बसपा ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर रखी है जिसकी अदालत में सुनवाई चल रही है. बसपा के वकीलों को उम्मीद है कि हाईकोर्ट का फ़ैसला जल्द आ सकता है और उस फ़ैसले से राजनीतिक रूप से उथल-पुथल हो सकती है. दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के नेताओं का कहना है कि उनके पास पर्याप्त बहुमत है और सरकार को कोई ख़तरा नहीं है. दरअसल उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के 37 विधायक बाग़ी हो गए थे और वे मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए थे. तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष केसरी नाथ त्रिपाठी ने इस विलय को मंज़ूरी दे दी थी. |
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