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राजा भैया एक बार फिर मंत्री बने | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विवादास्पद विधायक रघुराजप्रताप सिंह यानी राजा भैया को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने एक बार फिर मंत्रिमंडल में शामिल किया है. राजा भैया के ख़िलाफ़ जबलपुर की अदालत में आतंकवाद निरोधक क़ानून,पोटा का मामला चल रहा है. उन पर से मुलायम सिंह सरकार ने पोटा हटाया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस निर्णय को रद्द कर दिया था. उसके बाद राजा भैया ने मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया था. ग़ौरतलब है कि राजा भैया मुलायम सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री थे. अदालत ने उनकी ज़मानत भी रद्द कर दी थी और मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश में करने का आदेश दे दिया था. सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद राजा भैया ने कानपुर में पोटा अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था और अब इस मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में चल रही है. राजनीतिक समीकरण राजा भैया पर कई आपराधिक मामलों में मुक़दमे चल रहे हैं जिनमें हत्या और अपहरण के मामले शामिल हैं. राजा भैया ने इन आरोपों को ग़लत बताते हुए इन्हें राजनीति से प्रेरित बताते हैं. पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के शासन काल के दौरान जनवरी,2003 में उन्हें पोटा के तहत गिरफ़्तार कर लिया गया था और 19 महीने जेल में बिताने के बाद वो छूटे थे. ठाकुर नेता राजा भैया प्रतापगढ़ ज़िले में स्थित एक पुरानी रियासत भदरी के राजपरिवार से हैं. राजा भैया ने मुलायम सिंह को समर्थन देने की घोषणा की थी और माना जाता है कि इससे समाजवादी पार्टी को लाभ मिला था. अमर सिंह के फ़ोन टैंपिग के मामले में केंद्र सरकार से जूझ रही समाजवादी पार्टी ने इस क़दम से एक बार फिर ठाकुर वोटों को लुभाने की कोशिश की है. | इससे जुड़ी ख़बरें राजा भैया मुलायम मंत्रिमंडल में शामिल16 जुलाई, 2004 | भारत और पड़ोस राजा भैया मामले के गवाह की हत्या | भारत और पड़ोस भाजपा-बसपा में मतभेद उभरे | भारत और पड़ोस पोटा नहीं हटेगा: मायावती27 जनवरी, 2003 | पहला पन्ना बाग़ी विधायक जेल भेजे गए03 नवंबर, 2002 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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