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नगालैंड में पाँच विद्रोहियों की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्वोत्तर राज्य नगालैंड में अधिकारियों ने बताया है कि अलगाववादी नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नगालैंड यानी एनएसीएन के दो विरोधी गुटों में संघर्ष में पाँच विद्रोही मारे गए हैं. एनएसीएन (आईएम) और एनएसीएन (के) के सदस्यों के बीच गुरुवार को एक गाँव मे संघर्ष शुरू हो गया था, जो शुक्रवार तक चला. दोनों ही गुट भारत सरकार के ख़िलाफ़ लंबे समय से सशस्त्र संघर्ष करते रहे हैं. हालाँकि वर्ष 2000 में दोनों गुटों ने भारत सरकार के साथ संघर्षविराम किया था जो अभी भी लागू है. लेकिन दोनों गुट अक्सर आपस में उलझते रहते हैं. दूसरी ओर भारत सरकार ने सेना को निर्देश दिए हैं कि वो पूर्वोत्तर राज्यों में अलगाववादियों के ख़िलाफ़ अपना अभियान फिर से शुरू कर दें. संघर्षविराम? सरकार ने दोहराया है कि अलगाववादियों के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान तब तक चलता रहेगा जब तक उनकी ओर से संघर्षविराम की लिखित घोषणा नहीं की जाती. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायण ने अलगाववादियों और भारत सरकार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रही जानीं-मानीं साहित्यकार इंदिरा गोस्वामी को बताया कि अभी तक संघर्षविराम की लिखित घोषणा भारत सरकार को नहीं दी गई हैं. उन्होंने बताया कि इसे देखते हुए अब ऐसा संभव नहीं होगा कि भारत सरकार अलगाववादियों के ख़िलाफ़ अपने सैन्य अभियानों को और अधिक समय के लिए स्थगित रखे. मध्यस्थ इंदिरा गोस्वामी ने इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा है कि उनकी कोशिश है कि दोनों पक्ष बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ें. किसी को भी बातचीत के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि राहत की बात इतनी ही है कि भारत सरकार की ओर से कहा गया है कि वो अपने सैन्य अभियान को कुछ दिनों बाद ही शुरू करेंगे. ग़ौरतलब है कि पूर्वोत्तर राज्यों में पिछले डेढ़ महीने से संघर्ष विराम लागू है. भारत सरकार ने कड़ा रुख़ अख़्तियार करने से पहले पिछले महीने दो चरणों में तमाम एजेंसियों से विचार-विमर्श किया था. इन बैठकों में सेना ने मज़बूती से अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अलगाववादी संगठन उल्फ़ा पूर्वोत्तर राज्यों में अपना प्रभाव और बढ़ाने के लिए प्रयास शुरू करने वाला है. इसे देखते हुए संघर्षविराम की अवधि को बढ़ाना उचित नहीं होगा. | इससे जुड़ी ख़बरें 'उल्फ़ा की प्रतिक्रिया सकारात्मक होगी'18 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस दस दिनों के लिए सैनिक कार्रवाई रुकी13 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस मुठभेड़ में शीर्ष उल्फ़ा नेता की मौत01 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस हिंसक झड़पों के बाद हड़ताल का आहवान12 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस असम में हिंसा के बाद कर्फ़्यू11 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस उल्फ़ा के साथ बातचीत 24 अक्तूबर को05 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस उल्फ़ा विद्रोहियों ने केंद्र को पत्र लिखा03 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस आग की वजह से तेल के कुएँ बंद19 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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