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उल्फ़ा के साथ बातचीत 24 अक्तूबर को | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार और असम के अलगाववादी संगठन उल्फ़ा की 11 सदस्यीय समीति के बीच 24-25 अक्तूबर को बातचीत होगी. गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बातचीत की तारीख़ की पुष्टि की है. माना जा रहा है कि इसके बाद उल्फ़ा के प्रतिनिधियों और भारत सरकार के बीच बातचीत हो पाएगी. ये बातचीत भारत की राजधानी दिल्ली में होगी. मंगलवार को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम के नारायणन और उल्फ़ा की ओर से मध्यस्ता कर रहीं लेखिका इंदिरा गोस्वामी और रेबती फूकन के बीच मुलाक़ात हुई. इसी दौरान बातचीत की तारीख़ तय की गई. इंदिरा गोस्वामी ने बताया, “बातचीत करने का फ़ैसला एक अहम क़दम है. हमें इससे काफ़ी उम्मीद है.” इस बीच भारत सरकार ने उल्फ़ा के ख़िलाफ़ जारी सभी अभियानों को रोकने का फ़ैसला लिया है. गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि इसकी औपचारिक घोषणा के लिए तैयारी चल रही है. गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि ये बात पक्की है कि कुछ समय के लिए उल्फ़ा के ख़िलाफ़ जारी अभियान को रोक दिया जाएगा और सरकार उम्मीद करती है कि उल्फ़ा भी जल्द ही संघर्षविराम की घोषणा कर देगी. बातचीत करने के लिए उल्फ़ा ने पीपुल्स कंस्ल्टेटिव कमेटी नाम की एक समिति गठित की है जिसमें साहित्यकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता, वकील, समाजसेवी और खिलाड़ी शामिल हैं. |
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