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विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान बंद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय सेना ने असम में विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अपना अभियान रोकने की घोषणा की है. सेना के अधिकारियों ने बताया है कि उन्हें शीर्ष स्तर से निर्देश मिला है कि अभियान को स्थगित कर दिया जाए. असम की राजधानी गुवाहाटी से सेना के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया, "हमसे कहा गया है कि हम विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अपना अभियान रोक दें, हमें इस आदेश का पालन करना है." इससे पहले मंगलवार को ही भारतीय सेना ने असम के जंगलों में उल्फ़ा के विद्रोहियों की तलाश में ज़ोरदार अभियान शुरू किया था, इस अभियान में में उल्फ़ा के दो नेता मारे गए थे. सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपना नाम न बताने की शर्त पर कहा, "हम उनके भागने के रास्ते बंद करने के लिए डटे हुए थे लेकिन अब हमें स्पष्ट निर्देश मिले हैं कि अभियान बंद कर दिया जाए." उल्फ़ा इससे पहले उल्फ़ा ने कहा था कि भारतीय सेना ने उनके 12 छापामारों और एक वरिष्ठ कमांडर को मार डाला था. उल्फ़ा के वरिष्ठ कमांडर अचिंत्य सैकिया के मारे जाने के बारे में सेना खामोश रही थी लेकिन अब उसने माना है कि सैकिया और दूसरे विद्रोहियों को सेना ने उनके शिविर में घुसकर मार डाला था. उल्फ़ा के हथियारबंद गुट के प्रमुख परेश बरूआ ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि अगर भारतीय सेना ने कार्रवाई जारी रखी तो केंद्र सरकार से बातचीत संभव नहीं है. बरूआ ने कहा, "दिल्ली की सरकार हमें बंदूक की नोक पर बातचीत के लिए कैसे मजबूर कर सकती है, ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता." माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री तरूण गोगोई के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने यह फ़ैसला किया है ताकि उल्फ़ा के साथ बातचीत शुरू हो सके. |
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