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उल्फ़ा विद्रोहियों ने केंद्र को पत्र लिखा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
असम के अलगाववादी संगठन उल्फ़ा ने भारतीय प्रधानमंत्री की ओर से भेजे गए बातचीत के प्रस्ताव पर आधिकारिक प्रतिक्रिया व्यक्त की है. जानी-मानी असमिया लेखिका इंदिरा गोस्वामी ने उल्फ़ा के प्रमुख अरबिंद राजखोआ का एक पत्र प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायण को सौंपा है. इंदिरा गोस्वामी उल्फ़ा और केंद्र सरकार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रही हैं और उन्होंने पत्रकारों को इसके बारे में जानकारी दी. इंदिरा गोस्वामी ने यह बताने से इनकार कर दिया कि उल्फ़ा के प्रमुख ने अपनी चिट्ठी में क्या लिखा है, लेकिन उन्होंने बताया कि उल्फ़ा का प्रतिनिधित्व करने वाली ग्यारह सदस्यीय समिति और केंद्र सरकार के अधिकारियों के बीच अक्तूबर में ही बातचीत शुरू हो सकती है. उल्फ़ा ने पीपुल्स कंस्ल्टेटिव कमेटी नाम की एक समिति गठित की है जिसमें साहित्यकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता, वकील, समाजसेवी और खिलाड़ी शामिल हैं, इंदिरा गोस्वामी इस समिति की प्रमुख सदस्य हैं. 'युद्धविराम' इस बीच उल्फ़ा ने अपने मासिक पर्चे में लिखा है कि वह युद्धविराम तभी घोषित कर सकता है जबकि सरकार पूरे क्षेत्र में उसके ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाइयाँ बंद कर दे. उल्फ़ा का कहना है कि हालाँकि सरकार ने उसके ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई रोक देने की घोषणा की है लेकिन डिब्रूगढ़ के पास के जंगलों में उसके ख़िलाफ़ अभियान जारी रखे हुए है. उल्फ़ा के पर्चे में कहा गया है,"हम किस तरह युद्धविराम घोषित कर सकते हैं जबकि हमारे योद्धाओं पर भारतीय सेना घेरकर हमले कर रही है?" असम के अलगाववादी आंदोलन पर नज़र रखने वालों का कहना है कि यह परस्पर विश्वास का मामला है और दोनों पक्ष चाहते हैं कि पूर्ण युद्धविराम दूसरी तरफ़ से हो. |
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