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हिंसक झड़पों के बाद हड़ताल का आहवान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
असम में पुलिस हिरासत में एक युवक की मौत और फिर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों और झड़पों के बाद अलगावावादी संगठन अल्फ़ा और छात्र संगठनों ने हड़ताल का आहवान किया है. असम के अलगाववादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ़ असम (उल्फ़ा)ने सोमवार को पूरे राज्य में बारह घंटे की हड़ताल का आहवान किया. छात्र संगठन ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन ने मंगलवार को ऐसी ही हड़ताल का आहवान किया है. अल्फ़ा ने भारत सरकार के साथ वार्ता करने के लिए जिस नागरिक समिति का गठन किया है, उसने चेतावनी दी है कि यदि असम में सैन्य अभियान बंद नहीं किए जाते तो वह वार्ता से पीछे हट जाएगी. इस समिति के सदस्य लचित बार्दोलोई का कहना था, "हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार असम में सैन्य अभियान न करने की अपनी प्रतिबद्धता निभाए और इसका उल्लंघन न करे. काकोपाथर में पुलिस हिरासत में युवक की मौत के बाद जो घटनाएँ हुई हैं, वे भारत सरकार के आश्वासन का उल्लंघन हैं." पुलिस हिरासत में युवक अजीत महंता की मौत के बाद तिनसुकिया ज़िले के कुछ इलाक़ों में हिंसक झड़पें हईं और कर्फ़्यू लगा दिया गया. तिनसुकिया ज़िले के काकोपाथर इलाक़े में हुई हिंसा में दो पुलिसकर्मी और पाँच अन्य लोग मारे गए थे. पुलिस का कहना है कि हिंसा पर उतारू भीड़ को तितर-बितर करने के लिए उन्हें गोली चलानी पड़ी. | इससे जुड़ी ख़बरें विदेशी नागरिक क़ानून में संशोधन होगा10 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'रिहा किए जा सकते हैं असम के विद्रोही'08 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस अल्फ़ा के साथ दूसरे दौर की चर्चा07 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'अल्फ़ा के साथ दूसरे दौर की वार्ता होगी'23 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस असम में अल्फ़ा ने कई धमाके किए22 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस अल्फ़ा करेगा गणतंत्र दिवस का बहिष्कार20 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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