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मंगलवार, 25 जुलाई, 2006 को 03:24 GMT तक के समाचार
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एक बच्चा बताइए हज़ार रुपए पाइए!

एक कक्षा के सामने खड़े बच्चे
बच्चों का स्कूल न आना या स्कूल छोड़ देना सरकारों के लिए एक समस्या है
किसी अपराधी या गुमशुदा की सूचना देने पर इनाम देने की बात तो आपने सुनी होगी.

लेकिन अब छत्तीसगढ़ के सरगुजा में शासन ने स्कूल नहीं जाने वाले बच्चे की सूचना देने पर एक हज़ार रुपए इनाम देने की घोषणा की है.

ज़िले के कलेक्टर द्वारा इस इनाम की घोषणा के बाद लोग गांव-गांव में ऐसे बच्चों पर नज़र रख रहे हैं, जिन्होंने किसी स्कूल में प्रवेश नहीं लिया है.

शिक्षा विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी ऐसे बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं क्योंकि इनाम की राशि उनकी ही तनख़्वाह से दी जाएगी.

20 लाख की आबादी वाले सरगुजा में लगभग 11 लाख लोग अभी भी निरक्षर हैं.

साक्षरता और शिक्षा के नाम पर चलाए गए दूसरे कार्यक्रमों की तरह सरकार के 'सर्व शिक्षा अभियान' का भी इस ज़िले में कुछ ख़ास असर नहीं पड़ा है.

राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इसी ज़िले से राज्य भर में चलने वाले 15 दिवसीय शाला प्रवेशोत्सव की शुरुवात की थी.

 इनाम की यह राशि स्कूल के शिक्षक, संकुल केंद्र समन्वयक, खंड स्रोत समन्वयक और विकासखंड शिक्षा अधिकारी से वसूल की जाएगी क्योंकि बच्चों को स्कूल तक लाने की ज़िम्मेवारी इनकी ही है
मनोज कुमार पिंगुआ, कलेक्टर

शिक्षा विभाग का पूरा अमला स्कूल नहीं जाने वाले या स्कूली पढ़ाई छोड़ देने वाले बच्चों को स्कूल तक लाने के लिए जुटा रहा. लेकिन 15 दिन तक यह उत्सव मनाने के बाद भी 6 से 14 वर्ष की आयु समूह के आधे से भी कम बच्चे स्कूल तक पहुंच पाए.

'सर्व शिक्षा अभियान' में इस आयु समूह के सभी बच्चों की उपस्थिति स्कूल में सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया था.

इनाम

स्कूल आने वाले बच्चों की इस संख्या को देखते हुए अंततः कलेक्टर ने घोषणा की कि कोई भी व्यक्ति 6 से 14 वर्ष की आयु के स्कूल अप्रवेशी बच्चे की सूचना लिखित में दे कर एक हज़ार रुपए का इनाम पा सकता है.

ज़िले के कलेक्टर मनोज कुमार पिंगुआ कहते हैं, “इनाम की यह राशि स्कूल के शिक्षक, संकुल केंद्र समन्वयक, खंड स्रोत समन्वयक और विकासखंड शिक्षा अधिकारी से वसूल की जाएगी क्योंकि बच्चों को स्कूल तक लाने की ज़िम्मेवारी इनकी ही है.”

कलेक्टर के अनुसार बच्चों को स्कूल लाना और उन्हें दाख़िला दे देने भर से ज़िम्मेवारी पूरी नहीं मानी जाएगी.

सरगुजा का एक स्कूल
बहुत सारे स्कूल भवनों की हालत ख़राब है

तीन महीने बाद यह भी देखा जाएगा कि जिस बच्चे को स्कूल में दाख़िला दिया गया है, वह 15 दिन से अधिक अनुपस्थित तो नहीं है. अगर कोई बच्चा अनुपस्थित पाया जाता है तो माना जाएगा कि बच्चे ने स्कूल आना छोड़ दिया है. इस स्थिति में भी शिक्षकों और संबंधित अधिकारियों पर कार्यवाही होगी.

कलेक्टर की इनाम बांटने की यह घोषणा कितने बच्चों को स्कूल तक ला पाती है, यह तो भविष्य बताएगा लेकिन शिक्षा से जुड़े कई मुद्दे ऐसे हैं, जिनका जवाब तलाशने में किसी की दिलचस्पी नहीं है.

लखनपुर के शिक्षक संजय गुप्ता का मानना है कि सरकार को सबसे पहले बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए.

वे सर्व शिक्षा अभियान और इस तरह के इनाम को हाथी का दाँत बताते हुए कहते हैं- “इस शैक्षणिक सत्र में सरगुजा में ग्यारह सौ नए स्कूल खुले हैं लेकिन किसी भी स्कूल के भवन नहीं बने हैं. सवाल यही है कि बच्चों का दाख़िला करवा भी दिया जाएगा तो भी उनके पढ़ने की व्यवस्था कहां होगी? ”

दूसरी ओर जो भवन हैं, उनकी जर्जर हालत देखकर यह कल्पना करना मुश्किल लगता है कि वहाँ कक्षाएँ किस तरह लगती होंगी.

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