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स्कूली बच्चों को अमानवीय सज़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
छत्तीसगढ़ के एक स्कूल में बच्चों को दोपहर के खाने में भाँग देने की घटना ने काफ़ी तूल पकड़ा था लेकिन अब एक और मामला सामने आ गया है जिसने शिक्षा अधिकारियों की नींद हराम कर दी है. छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर जिले में एक शिक्षक को बच्चों को मानव मल खिलाने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया है. आदिवासी अत्याचार निरोधक अधिनियम के तहत गिरफ़्तार किए गए शिक्षक का कहना है कि उन्होंने ऐसा छात्रों की तंबाकू की लत को छुड़ाने के लिए किया. बस्तर के जिला मुख्यालय जगदलपुर से लगभग 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नलपावंड में यह घटना तब सामने आई जब गाँव के एक बच्चे की तबीयत ख़राब हो गई. बताया जाता है कि नलपावंड विद्यालय के शिक्षक तपन कुमार पाणिग्रही ने स्कूल के कुछ बच्चों को तंबाकू खाते देख लिया. इसके बाद शिक्षक ने विद्यालय के सभी छात्रों के हाथ देखे और जिन छात्रों के हाथ पर तंबाकू रगड़ने के निशान थे उन्हें जबरन डंडे के ज़ोर पर यह सज़ा दी गई. शाम को जब गाँव के एक बच्चे की तबीयत ख़राब होने लगी तो मामला उजागर हुआ. विवाद बाद में स्कूल में पढ़ने वाले सभी बच्चों के अभिभावक इकट्ठे हुए और आनन-फानन में गांव के आदिवासी समाज की एक बैठक बुलाई गई. इस बैठक में तय किया गया कि आरोपी शिक्षक प्रत्येक पीड़ित छात्र को 20-20 हज़ार रुपए का मुआवज़ा दे.
आरोपी शिक्षक ने यह कहते हुए मुआवज़ा देने से इनकार कर दिया कि उसने छात्रों की तंबाकू खाने की लत छुड़ाने के उद्देश्य से ऐसा किया. इसके अलावा शिक्षक का कहना था कि उसने छात्रों को मानव मल नहीं, गोबर खिलाया है. हालाँकि शिक्षक ने गाँव वालों को पाँच हज़ार रुपए दिए भी लेकिन गाँव वाले 20 हज़ार की रक़म पर अड़ गए. शिक्षक के इनकार के बाद गांव वालों ने मामला पुलिस को सौंप दिया. ज़िले के पुलिस अधीक्षक हिमांशु गुप्ता के अनुसार आरोपी शिक्षक को आदिवासी अत्याचार अधिनियम के तहत गिरफ़्तार कर लिया गया है. चिंता राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है. आयोग के सुभाष मिश्रा के अनुसार- “यह अत्यंत चिंताजनक मामला है और हमने बस्तर के पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं.” बस्तर में छात्रों की प्रताड़ना के किस्से पिछले कुछ समय से लगातार सामने आ रहे हैं. कुछ दिन पहले ही एक शिक्षक ने दो छात्रों के सर आपस में टकरा दिया था जिससे दोनों बच्चों की मौत हो गई थी, इन बच्चों का कसूर ये था कि वे क्लास छोड़कर गाय चराने चले गए थे. राज्य के शिक्षा मंत्री अजय चंद्राकर कहते हैं- “बस्तर में इस तरह की घटनाओं ने हमे चौंका दिया है. बच्चों को मानव मल खिलाने की ख़बर भयावह है और इस मामले में हम कड़ी कार्रवाई करेंगे.” ऐसे आश्वासन पहले भी दिए गए हैं लेकिन इस तरह की अनेक घटनाओं के बाद लगने लगा है कि शिक्षकों को भी छात्रों के साथ अच्छे व्यवहार का पाठ पढ़ाने की ज़रूरत है. |
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