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अमरीका के 'इंडिया संडे स्कूल' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रवासी भारतीय केवल निवेश और अर्थव्यवस्था में ही दिलचस्पी नहीं रखते हैं, उन्हें भारतीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था की भी चिंता है. अमरीका से प्रवासी भारतीय दिवस में हिस्सा लेने आए डॉक्टर महादेव चंद पेशे से डॉक्टर हैं लेकिन हिंदी के प्रचार-प्रसार में लगे हैं और वो अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति के सदस्यता अभियान समिति के अध्यक्ष हैं. बीबीसी से विशेष बातचीत में उन्होंने जानकारी दी कि इस समय अमरीका में लगभग सौ ‘इंडिया संडे स्कूल’ चलते हैं. इनमें से कुछ विश्व हिंदू परिषद, कुछ हिंदू मंदिर और लगभग 40 स्कूल अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति चलाती हैं. ये स्कूल हर रविवार को लगते हैं इसलिए संडे स्कूल कहलाते हैं. इनमें हिंदी भाषा के अलावा भारतीय संस्कृति की भी शिक्षा दी जाती है. दिलचस्प तथ्य यह है कि इन स्कूलों में पढ़ाने वाले पेशे से डॉक्टर, इंजीनियर जैसे लोग होते हैं. कुछ ही लोग ऐसे होते हैं जिन्होंने बीए तक हिंदी पढ़ी होती है. डॉक्टर महादेव चंद मूल रूप से बिहार के हैं और 1990 के दशक में दिल के ऑपरेशन के सिलसिले में वो अमरीका गए और वहीं के होकर रह गए. उनकी दो बेटियाँ हैं जो अमरीका में डॉक्टर हैं. उन्हें भारत सरकार से बेहद अपेक्षाएँ हैं. उनका कहना है कि काफ़ी मांग के बाद सरकार ने अंग्रेज़ी से हिंदी सीखने की एक वेबसाइट विकसित की लेकिन उसमें बेहद सुधार की ज़रूरत है. उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं है कि हिंदी के प्रचार में भारत सरकार ही योगदान दे रही हो. हाल में अमरीका के पांच प्रांतों ने 14 सितंबर को सरकारी स्तर पर हिंदी दिवस मनाने का फ़ैसला किया है. | इससे जुड़ी ख़बरें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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