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'वोट के अधिकार पर फ़ैसला जल्द' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हैदराबाद में चौथे प्रवासी भारतीय दिवस का उदघाटन करते हुए घोषणा की कि सरकार प्रवासी भारतीयों को वोट देने के अधिकार पर विचार कर रही है और प्रस्ताव अंतिम चरण में है जिस पर जल्दी ही फ़ैसला ले लिया जाएगा. इस मौक़े पर मनमोहन सिंह ने दो प्रवासी भारतीयों को 'ओवरसीज़ सिटीज़न ऑफ़ इंडिया' का दर्जा देनेवाले कार्ड सौंपे. वर्ष 2005 में मुंबई में आयोजित प्रवासी दिवस के दौरान इसकी घोषणा की गई थी. प्रधानमंत्री ने हैदराबाद में प्रवासी भारतीयों के लिए कई योजनाओं की घोषणा भी की. उनका कहना था कि खाड़ी में रहने वाले प्रवासी भारतीयों की स्थित अलग है, वे कभी वहाँ के नागरिक नहीं बनते हैं. उनके परिवार भारत में रहते हैं और उनकी भूमिका स्थानीय सरकारों में रहती है. इसलिए उनका मतदान का अधिकार देने की बात का मज़बूत आधार है. प्रधानमंत्री ने कहा, "प्रवासी भारतीयों को भारत पैसा भेजने में काफ़ी परेशानी पेश आती है. इसके लिए सरकार ने यूटीआई बैंक के साथ मिलकर एक इलेक्ट्रॉनिक गेटवे तैयार किया है जिससे समस्या का हल निकलेगा." उन्होंने एक फ़रवरी, 2006 से प्रवासी भारतीय बीमा योजना शुरू करने की भी घोषणा की जिसके बारे में कहा गया कि यह काफ़ी उदार होगी. मनमोहन सिंह ने प्रवासी ज्ञान नेटवर्क बनाने की भी बात की ताकि प्रवासी भारतीयों के साथ जानकारी का आदान-प्रदान हो सके. उन्होंने भारतीय शिक्षा संस्थानों में बाहर के छात्रों को आकर्षित करने के लिए ब्रिटिश कॉउंसिल जैसी संस्था बनाने की बात कही. साथ ही कहा कि भारतीय मूल के लोगों को लेकर एक विश्वविद्यालय स्थापित करने का विचार भी सामने आया है और इस पर विचार आमंत्रित किए. प्रवासी भारतीय दिवस के मुख्य अतिथि दक्षिण अफ़्रीका के अहमद कथरादा थे. उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ़्रीका के रंगभेद आंदोलन में प्रवासी भारतीयों ने अहम भूमिका निभाई थी. इस मौक़े पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी और प्रवासी भारतीय मंत्रालय के प्रभारी मंत्री ऑस्कर फर्नांडिस ने भी प्रवासी भारतीयों के योगदान की सराहना की. सम्मेलन में लगभग 1200 प्रवासी भारतीय हिस्सा ले रहे हैं. इसमें कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हैं. दुनिया भर में भारतीय दुनियाभर में भारतीय मूल के क़रीब दो करोड़ लोग रहते हैं. इनमें से ज़्यादातर लोग उन्नीसवीं शताब्दी में आर्थिक कारणों से भारत छोड़ कर गए थे. आज दुनिया का शायद ही कोई हिस्सा होगा जहाँ भारतीय न रहते हों.
सबसे ज़्यादा भारतीय खाड़ी के देशों में रहते हैं. इनमें से लगभग आधे लोग केवल केरल से आते हैं. भारतीय मूल के लोगों की बड़ी संख्या मेहनत-मज़दूरी करती है. सरकारी आँकड़ों के अनुसार अमरीका मे लगभग 17 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं. ऑस्कर फर्नांडिस ने बताया कि अमरीका में लगभग 40 हज़ार भारतीय डॉक्टर हैं. अमरीका में रहने वाले भारतीय पढ़े-लिखे, जागरूक और बहुत ज़्यादा आय वाले लोग हैं. पिछले कुछ सालों में ये लोग एक महत्वपूर्ण राजनीतिक ताक़त के रुप में भी उभरे हैं. इसके अलावा कनाडा और कैरिबियाई द्वीप में भारतीयों की बड़ी संख्या है. ब्रिटेन में भारतीय मूल के क़रीब दस लाख लोग हैं और ये आर्थिक और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'प्रवासी भारतीयों की बाधाएँ दूर हों'10 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस दोहरी नागरिकता का दायरा व्यापक हुआ07 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस प्रवासियों से प्रगति में सहयोग की अपील26 सितंबर, 2004 | भारत और पड़ोस प्रधानमंत्री की कई आर्थिक घोषणाएँ09 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस कल्पना चावला को प्रवासी सम्मान08 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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