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दोहरी नागरिकता का दायरा व्यापक हुआ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन सभी प्रवासी भारतीयों को दोहरी नागरिकता उपलब्ध कराने की घोषणा की है जो 26 जनवरी 1950 के बाद भारत से बाहर जाकर बसे हैं. मुंबई में प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का उदघाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं 1950 के बाद विदेश में जाकर बसे सभी भारतीयों को दोहरी नागरिकता देने की घोषणा करता हूँ, बशर्ते उनका स्थानीय क़ानून इस बात की इजाज़त देता हो." उन्होंने कहा कि इसके लिए कागज़ी प्रक्रिया को भी आसान बनाया जा रहा है. मनमोहन सिंह ने कहा कि प्रवासी भारतीयों के भारत में रजिस्ट्रेशन के तरीक़े में सुधार पर भी विचार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इसके लिए स्मार्ट कार्ड समेत सभी विकल्पों का अध्ययन किया जा रहा है. उल्लेखनीय है कि पिछले साल भारतीय संसद ने अमरीका और ब्रिटेन समेत 16 देशों के प्रवासी भारतीयों को भारत की दोहरी नागरिकता दिए जाने को मंज़ूरी दी थी. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की शुक्रवार की घोषणा के बाद अब यह सुविधा सभी प्रवासी भारतीयों के लिए उपलब्ध हो गई है. एक अनुमान के अनुसार विदेशों में बसे भारतीयों की संख्या ढाई करोड़ से ज़्यादा है. भारतीय सरकार चाहती है कि देश में प्रवासी भारतीयों के निवेश की मात्रा बढ़े. माना जाता है कि ज़्यादा से ज़्यादा प्रवासी भारतीयों को दोहरी नागरिकता दिए जाने से यह काम आसान हो सकेगा. प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन में 60 देशों के 1500 से ज़्यादा प्रवासी भारतीय भाग ले रहे हैं. सम्मेलन तीन दिनों तक चलेगा. सम्मेलन में भारत में पिछले दिनों सूनामी लहरों से मची तबाही पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी. |
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