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बुधवार, 21 जून, 2006 को 15:32 GMT तक के समाचार
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अंग्रेज़ी नहीं बोलने पर दाखिला नहीं
स्कूल
गरिमा पब्लिक स्कूल में दाखिला लेना चाहती थी
दिल्ली में एक पब्लिक स्कूल ने 97 प्रतिशत अंक पाने वाली एक लड़की को अपने यहाँ प्रवेश देने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि उसकी अंग्रेज़ी कमज़ोर थी.

जानकारी के मुताबिक 16 वर्षीय गरिमा ने द्वारिका इलाक़े के दिल्ली पब्लिक स्कूल में 11वीं कक्षा में प्रवेश के लिए आवेदन किया था.

गरिमा के इस आवेदन पर स्कूल प्रशासन ने यह कहते हुए उसे प्रवेश देने से इनकार कर दिया कि वो अच्छी अंग्रेज़ी नहीं बोल पाती है.

उल्लेखनीय है कि दिल्ली के एक गांव की रहने वाली गरिमा ने इसी वर्ष 10वीं की परीक्षा 97.6 प्रतिशत अंक पाकर पास की है.

इस मामले के प्रकाश में आने के बाद दिल्ली सरकार की ओर से कहा गया है कि ऐसा करने के लिए पब्लिक स्कूल के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.

दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री अरविंदर सिंह कोहली ने बीबीसी को बताया कि इस मामले की जाँच के आदेश दे दिए गए हैं.

उन्होंने बताया,"गुरुवार तक इस मामले में रिपोर्ट आ जाएगी. अगर स्कूल का जवाब संतोषजनक नहीं रहता है तो हम स्कूल के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेंगे."

नीयत पर सवाल

उन्होंने स्कूल के फ़ैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि गरिमा ने हाईस्कूल की परीक्षा में जितने अंक हासिल किए हैं उसके बाद उसकी प्रतिभा पर संदेह नहीं किया जाना चाहिए.

 मेरे अंग्रेज़ी बोलने में अगर कुछ कमी है तो उसे सुधारने के लिए ही मैं इस स्कूल में जाना चाहती हूँ. अगर इसे स्कूल नहीं सुधारेगा तो फिर कौन सुधारेगा
गरिमा, छात्रा

उधर मन में प्रशासनिक सेवाओं में जाने का सपना संजोने वाली गरिमा भी स्कूल के इस फ़ैसले से दुखी है.

वो कहती है, "मेरे अंग्रेज़ी बोलने में अगर कुछ कमी है तो उसे सुधारने के लिए ही मैं इस स्कूल में जाना चाहती हूँ. अगर इसे स्कूल नहीं सुधारेगा तो फिर कौन सुधारेगा."

गरिमा के पिता एक पुलिस कांस्टेबल हैं और केवल 12वीं तक पढ़े-लिखे हैं. वो इस मामले में स्कूल की नीयत पर ही उंगली उठाते हैं.

उन्होंने कहा, "स्कूल ने अपने फ़ार्म में सारी जानकारी माँगी. मसलन पिता कितना कमाते हैं, माँ क्या करती है. उन्हें मालूम है कि हम ग़रीब परिवार से हैं. पर इसके आधार पर दाखिला नहीं दिया जाना चाहिए. प्राथमिकता तो यह होनी चाहिए कि बच्चा पढ़ना चाहता है."

कल तक गरिमा को मिली सफलता की खुशी मना रहा उसका परिवार स्कूल के इस फ़ैसले से काफ़ी आहत महसूस कर रहा है.

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