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नर्सरी के लिए बच्चों का इंटरव्यू नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजधानी दिल्ली की एक अदालत ने निजी स्कूलों में नर्सरी कक्षाओं में भर्ती से पहले बच्चों का इंटरव्यू लेने पर रोक लगा दी है. अब तक सभी निजी स्कूलों में भर्ती से पहले बच्चों को और उनके माता-पिता को लंबे इंटरव्यू के दौर से गुज़रना होता था. इस प्रक्रिया का अभिभावक लंबे समय से विरोध करते आ रहे थे. एक स्वयंसेवी संस्था और कुछ अभिभावकों की ओर से एक याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी. संभावना है कि इस निर्णय का राजधानी के दस लाख से ज़्यादा बच्चों पर असर होगा. गत दिसंबर में दिल्ली हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों से कहा था कि वे नए दिशा निर्देश तैयार करें जिससे इंटरव्यू से छुटकारा पाया जा सके. लेकिन स्कूलों ने इस आदेश का पालन नहीं किया. बुधवार को अदालत ने कहा है कि दिल्ली के 1600 निजी स्कूल यदि चार हफ़्तों के भीतर दिशा निर्देश तैयार नहीं करते हैं तो अदालत अपनी ओर से नियम जारी कर देगी. अभिभावकों की ओर से इस मामले के वकील अशोक अग्रवाल ने कहा, "इस आदेश से तीन चार साल के बच्चों पर हो रहा अत्याचार बंद हो सकेगा." उधर निजी स्कूलों का कहना है कि उनके पास आवेदनों का अंबार लगा होता है और चूंकि सभी को प्रवेश देना संभव नहीं है इसलिए साक्षात्कार लिया जाता है. लेकिन कुछ स्कूलों ने इसका स्वागत भी किया है. मसलन दिल्ली पब्लिक स्कूल की एक शाखा की प्रिंसिपल श्यामा चोना ने कहा, "हम इस फ़ैसले से पूरी तरह से सहमत हैं." | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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