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नेपाल में अब भी प्रदर्शन जारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में पिछले कई दिनों से जारी प्रदर्शनों में शनिवार को पहली बार हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने काठमांडो शहर के बीचोबीच कर्फ्यू का उल्लंघन कर प्रदर्शन किया. कई हजा़र प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़कर नेपाल नरेश के नारायणहित्ति महल की तरफ मार्च किया. प्रदर्शनकारी मांग कर रहे थे कि नरेश और लोकतांत्रिक रियायतें दें. शहर में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े जिसमें कई लोग घायल हो गए. भीड़ को तितर बितर करने के लिए पुलिस ने गोलियां भी चलाईं. अस्पताल अधिकारियों का कहना है कि 150 लोग घायल हुए हैं. शनिवार की सुबह आठ घंटे के कर्फ्यू के बावजूद लोग घरों से बाहर निकले और महल की तरफ मार्च करना शुरु किया. सेना ने काठमांडो में प्रदर्शनकारियों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए थे लेकिन इसके बावजूद हज़ारों लोगों की भीड़ जमा हुई. प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे कि हमें लोकतंत्र चाहिए राजा नहीं. कई स्थानों पर पुलिस और सैनिकों से प्रदर्शनकारियों की हिंसक झड़पें हुईं. सुरक्षा बलों ने इन्हें रोकने के लिए कई बार लाठियों का भी सहारा लिया. बीबीसी संवादादाता निक ब्रायन्ट के अनुसार ऐसी ही एक झड़प में दो लोग बुरी तरह घायल हुए हैं. शहर के कई अन्य हिस्सों से हिंसा की ख़बरें भी आ रही हैं. संवाद समिति एपी के अनुसार एक अस्पताल में कम से कम चार लोग गोलियों से घायल होकर आए हैं जबकि 40 लोग पुलिस की लाठी से घायल होने के बाद पहुंचे हैं. काठमांडू के मॉडल अस्पताल के अनुसार वहां दर्ज़नों घायल पहुंचे हैं. पिछले कई दिनों से हो रहे प्रदर्शनों में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है. ये प्रदर्शन नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र की उस घोषणा के एक दिन बाद हो रहे हैं जिसमें उन्होंने बहुदलीय लोकतंत्र की बहाली का प्रस्ताव रखा था. हालांकि सात विपक्षी दलों के गठबंधन ने राजा के इस प्रस्ताव को ख़ारिज़ कर दिया है. उधर माओवादी विद्रोहियों ने भी राजा के प्रस्ताव को नकार दिया है. कुछ दलों ने संविधान सभा के गठन की मांग भी की है जिसे नरेश के भविष्य का फ़ैसला भी करने का अधिकार होगा. नरेश का संबोधन उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को टेलीविज़न पर राष्ट्र के नाम संबोधन में नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने राजनीतिक दलों के गठबंधन के समक्ष अंतरिम सरकार बनाने और नए प्रधानमंत्री का नाम सुझाने का प्रस्ताव रखा था. इन राजनीतिक दलों का कहना है कि नेपाल नरेश की घोषणा उनकी मूलभूत मांगों की अनदेखी कर रहा है. उनका कहना है कि इन मांगों में राजा के भविष्य का फैसला करने वाली संविधान सभा के गठन की बात शामिल है जिसके बारे में राजा ने कुछ नहीं कहा है. भारत ने नरेश की घोषणा का स्वागत किया है और कहा है कि इससे राजनीतिक स्थायित्व आ सकेगा. उधर अमरीका में सरकार के एक प्रवक्ता ने नरेश से अपने वादों को पूरा करने की अपील की है और राजनीतिक गठबंधन से राजा के प्रस्ताव पर जल्दी फ़ैसला करने के लिए भी कहा है. |
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