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राष्ट्रपति बुश से पाकिस्तान की उम्मीदें.. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के राष्ट्रपति जार्ज बुश अपने दक्षिण एशिया दौरे के तहत जब पाकिस्तान आए तो विशेषज्ञों की नज़र इस पर टिकी कि इस दौरे से पाकिस्तान और ख़ासकर राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ किस तरह के फ़ायदे की उम्मीद कर रहे हैं. पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की इस दौरे से उम्मीदों का कुछ अंदाज़ा तो हाल के उनके बयान से लगाया जा सकता है. उन्होंने हाल में बीबीसी को दिए साक्षात्कार में कहा था कि वे उम्मीद करते हैं राष्ट्रपति बुश कश्मीर मुद्दा सुलझाने के लिए उन पर, भारतीयों पर और कश्मीरियों पर दबाव डालेंगे. इसके अलावा राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ये भी उम्मीद करेंगे कि अमरीकी राष्ट्रपति पाकिस्तान के कबायली इलाक़ों में चरमंथ के मसले को लेकर अपने बयानों में थोड़ा बचकर बोलें. आर्थिक फ़ायदा लेकिन रक्षा मामलों के विशेषज्ञ हसन असकर रिज़वी का कहना है कि राजनीतिक मुद्दे तो अहम हैं ही पर अमरीका के साथ सहयोग का पाकिस्तान को असल फ़ायदा आर्थिक स्तर पर हुआ है. आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज में जो तेज़ी का दौर चल रहा है उसमें 75 फ़ीसदी पैसा अमरीकी निवेशकों का लगा हुआ है. जॉर्ज बुश के पाकिस्तान दौरे से पहले यही अटकलें लगाई जाती रही हैं कि क्या उनके इस दौरे के तहत पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में और पैसा डाला जाएगा. मुशर्रफ़ का समर्थन विशेषज्ञों का कहना है कि कश्मीर के मसले को छोड़कर पाकिस्तान के राष्ट्रपति को बुश के इस दौरे से वो सब कुछ मिलेगा जिसकी उन्हें उम्मीद है. रक्षा विशेषज्ञों हसन असकर रिज़वी का कहना है कि अमरीका ये दिखाने के लिए तत्पर होगा कि उसकी नीतियाँ पाकिस्तानी लोगों की मदद करने के लिए भी हैं. जिसका मतलब है कि अमरीका पाकिस्तान में सामाजिक क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य और शिक्षा में पैसा लगता सकता है. अमरीकी राष्ट्रपति बुश ये कह चुके हैं कि लोकतंत्र को लेकर परवेज़ मुशर्रफ़ की सोच से वे सहमत हैं. इस बयान के बाद पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों ने राष्ट्रपति बुश के लिए होने वाले समारोह में हिस्सा न लेने का फ़ैसला किया है. अमरीकी राष्ट्रपति ऐसे समय पाकिस्तान आए हैं जब ‘आंतकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई’ में उनके सहयोगी पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ मुश्किलों में घिरे हुए हैं. चाहे वो विपक्ष का कड़ा रुख़ हो या फिर पाकिस्तान के कबायली इलाक़ो में सैन्य अभियान का विरोध हो. ऐसे में पाकिस्तानी राष्ट्रपति का समर्थन करने की जॉर्ज बुश की घोषणा, परवेज़ मुशर्रफ़ के लिए काफ़ी अहमियत रखती हैं. |
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