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'इतने नज़दीकी रिश्ते पहले कभी नहीं रहे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि भारत और अमरीका के रिश्ते इतने नज़दीकी कभी नहीं रहे. भारत की तीन दिवसीय यात्रा के अंतिम दिन उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर दुनिया को बदल सकते हैं. दिल्ली के पुराना क़िला में दिए गए अपने भाषण में राष्ट्रपति बुश ने भारत के आर्थिक विकास की जमकर तारीफ़ की और कहा कि अमरीका-भारत के बीच व्यापार बढ़ना चाहिए. उन्होंने लोकतंत्र को दुनिया की ज़रुरत बताया और दोनों देशों के बीच गुरुवार को हुए परमाणु सहमति का ज़िक्र करते हुए कहा कि इस समय सबसे बड़ी चुनौती ऊर्जा के संकट से निपटना है. इस भाषण के बाद राष्ट्रपति बुश पाकिस्तान के लिए रवाना हो गए और वे इस्लामाबाद पहुँच चुके हैं. लोकतंत्र की स्थापना 'नमस्ते' के साथ अपने भाषण की शुरुआत करते हुए अमरीकी राष्ट्रपति ने भारत की जमकर तारीफ़ की. इस तारीफ़ में जहाँ लोकतंत्र होने की तारीफ़ थी तो कई धर्म, जाति और संस्कृति के बीच सहिष्णुता बनाए रखने की भी. अमरीका को सबसे पुराना लोकतंत्र और भारत को सबसे बड़ा लोकतंत्र बताते हुए कहा, "आपके पास इतिहास की प्रेरणा है और आप भविष्य को देख सकते हैं. भारत हमारा स्वाभाविक सहयोगी है." महात्मा गाँधी का ज़िक्र करते हुए राष्ट्रपति बुश ने कहा, "महात्मा गाँधी ने कहा था कि आज़ादी ईश्वर की देन है और हमें इसको याद रखना चाहिए." पाकिस्तान उन्होंने इस बात का भी ज़िक्र किया कि पाकिस्तान के साथ अमरीका के रिश्तों को लेकर भारत में चिंता होती थी लेकिन अब समय बदल गया है. उन्होंने कहा, "अमरीका-पाकिस्तान के बीच अच्छे संबंध भारत के लिए अच्छे हैं और अमरीका-भारत के बीच अच्छे संबंध पाकिस्तान के लिए अच्छे हैं." उन्होंने कहा कि वे अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान वे पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से आतंक के ख़िलाफ़ लड़ाई में सहयोग के बारे में बात करेंगे. अपने भाषण में बुश ने कश्मीर विवाद के बारे में अमरीका की भूमिका की कोई चर्चा नहीं की जबकि पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने एक दिन पहले ही कहा था कि अमरीका को इस बारे में हस्तक्षेप करना चाहिए. उनका कहना था कि समृद्ध और लोकतांत्रिक पाकिस्तान अरब देशों में संतुलन बना सकता है और भारत के लिए एक अच्छा पड़ोसी साबित हो सकता है. राष्ट्रपति बुश ने अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निर्माण में भारत के योगदान की भी प्रशंसा की. भारत और बाज़ार उन्होंने अमरीका में भारतीयों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कल्पना चावला का ज़िक्र किया तो हैदराबाद को सानिया मिर्ज़ा का शहर बताया. उन्होने भारत को वैश्विक ताक़त बताते हुए कहा कि 1991 में आर्थिक नीति बदलने के बाद भारत का आर्थिक विकास दोगुना हो गया है. आउटसोर्सिंग की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हालांकि इसकी वजह से उनके देश में इसके कारण लोगों के रोज़गार ख़त्म हो रहे हैं लेकिन फिर भी कंपनियाँ लगातार भारत में अपना काम भेज रही हैं. उनका कहना था कि उनकी सरकार आउटसोर्सिंग को नहीं रोकेगी. भारतीय बाज़ार में अमरीकी उत्पादों के लिए अवसरों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने मैकडोनल्ड से लेकर जीई, माइक्रोसॉफ़्ट, वर्लपूल और बोइंग तक का ज़िक्र किया. |
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