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बुश के ख़िलाफ़ प्रदर्शन जारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के भारत पहुँचने के दूसरे दिन जिस वक़्त दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में बुश और भारत के प्रधानमंत्री के बीच बातचीत हो रही थी, उसी समय दिल्ली की सड़कों पर बुश विरोधी नारे गूँज रहे थे. जंतर-मंतर पर हज़ारों की तादाद में इकट्ठा हुए प्रदर्शनकारियों की रैली को संबोधित करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव, प्रकाश कारत ने कहा, "मैं मनमोहन सिंह को चेतावनी देता हूँ कि स्वतंत्र विदेश नीति से अलग न हों वरना देश की जनता उनसे अलग हो जाएगी." उन्होंने कहा कि भारत पिछले 50 वर्षों से अपनी आत्मनिर्भरता के साथ परमाणु क्षेत्र में विकास करता रहा है पर अमरीका उस स्वतंत्रता को ख़त्म करने का दबाव डाल रहा है. रैली में पहुँचे उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा, "आज तमाम वामदलों और अन्य संगठनों का यह प्रदर्शन प्रतीकात्मक ही है. हमें समझना होगा कि कांग्रेस और भाजपा की नीतियाँ एक जैसी ही हैं. मैं देश के हित में अपनी सरकार तक कुर्ब़ान करने को तैयार हूँ." रैली में प्रकाश कारत, एबी बर्धन, डी राजा, सीताराम येचुरी, दीपांकर भट्टाचार्य समेत कई वाम नेताओं विरोध दिल्ली स्थित रामलीला मैदान में गुरुवार सुबह से ही हज़ारों की तादाद में प्रदर्शनकारी इकट्ठा होने लगे. इनमें वामपंथी दलों, समाजवादी पार्टी और जनता दल सेक्युलर के कई कार्यकर्ताओं समेत कई जन संगठनों, मजदूर यूनियनों, रंगकर्मियों, आदिवासी समूहों और छात्रों ने हिस्सा लिया. रामलीला मैदान से बुश विरोधी बैनरों, मुखौटों और झंडों के साथ रैली निकाली गई जो जंतर-मंतर तक आई. कहीं गीत तो कहीं नारे, पर सभी स्वरों में एक ही बात थी- 'हत्यारे बुश, वापस जाओ'. कई रंगकर्मी अपने समूहों में आए थे और बुश के ख़िलाफ़ तमाम नुक्कड़ नाटकों का प्रदर्शन भी चल रहा था. कुछ आदिवासी समूहों ने भी बुश के ख़िलाफ़ अपनी पारंपरिक पोशाकों में विरोध प्रदर्शन किया. 'कितनी दूर है मौर्य होटल' रैली में चल रहे लोगों से बातचीत करने के दौरान किसी ने मुझसे पूछा, "कितनी दूर है मौर्य होटल?" इसपर साथ के किसी साथी ने बताया, "हमें तो जंतर मंतर तक जाना है. वहाँ से आगे पुलिस जाने ही नहीं देगी." शायद सच भी यही है कि सुरक्षा की तैयारियों के मद्देनज़र देखें तो रैली स्थल से बुश के ठहरने की जगह यानी मौर्य होटल की दूरी उतनी ही है, जितनी कि वाशिंगटन की. जिस वक्त दिल्ली की सड़कों पर इन प्रदर्शनों का वामदल नेतृत्व कर रहे थे, उसी वक्त वामदलों के समर्थन वाली सरकार के मुखिया, मनमोहन सिंह अमरीकी राष्ट्रपति के साथ तमाम नए संबंधों को अंतिम रूप दे रहे थे. बहरहाल, तमाम विरोध-प्रदर्शनों के बीच भारत-अमरीका के बीच संबंधों का विस्तार जारी है. | इससे जुड़ी ख़बरें भारत-अमरीका सहमति ऐतिहासिक क्यों?02 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस भारत-अमरीका में ऐतिहासिक परमाणु सहमति02 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'भारत-पाक-अमरीका मिलकर लड़े'02 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस बुश-मनमोहन के बीच अहम बातचीत02 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'बुश कश्मीर मसले का हल निकलवाएँ'01 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'स्वतंत्र विदेश नीति से समझौता न करें'01 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस बुश पर ही कटाक्ष, मज़ाक क्यों?01 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस बुश के विरोध में हज़ारों की रैली01 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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