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बुधवार, 01 मार्च, 2006 को 09:10 GMT तक के समाचार
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बुश के विरोध में हज़ारों की रैली
बुश का विरोध करने के लिए रैली
रैली में एक लाख से भी अधिक लोगों ने भाग लिया
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश की भारत यात्रा का विरोध करने के लिए मुस्लिम संगठनों के आव्हान पर हज़ारों लोगों ने प्रदर्शन रैली में भाग लिया.

दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई इस रैली में 'बुश वापस जाओ' और 'बुश हाय-हाय' जैसे नारे लगाए गए.

मंच पर मुस्लिम नेताओं के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर भी मौजूद थीं. मेधा पाटकर ने कहा कि हाल के समय के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन का आयोजन करके मुस्लिम संगठनों ने बड़ा काम किया है.

उल्लेखनीय है कि तीन दिनों की भारत यात्रा पर जॉर्ज बुश बुधवार की शाम दिल्ली पहुँच रहे हैं.

इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन जमीएत उलेमा-ए-हिंद ने नेतृत्व में कई मुस्लिम संगठनों ने किया था.

जमीयत के प्रवक्ता अब्दुल हुसैन ने कहा, "बुश जैसे व्यक्ति का स्वागत करना किसी हत्यारे का स्वागत करने जैसा है और उनके आने से महात्मा की धरती अपवित्र होगी."

 हम धर्मनिरपेक्षता और सांप्रदायिकता का फ़र्क समझते हैं इसीलिए केंद्र में आज यूपीए सरकार है लेकिन अगर अमरीका के साथ बातचीत में देश के लोगों के हितों की अनदेखी होती है तो इस सरकार को एनडीए से भी करारा सबक मिलेगा
मेधा पाटकर, सामाजिक कार्यकर्ता

रैली को संबोधित करते हुए मेधा पाटकर ने कहा, "हम धर्मनिरपेक्षता और सांप्रदायिकता का फ़र्क समझते हैं इसीलिए केंद्र में आज यूपीए सरकार है लेकिन अगर अमरीका के साथ बातचीत में देश के लोगों के हितों की अनदेखी होती है तो इस सरकार को एनडीए से भी करारा सबक मिलेगा."

रैली में लोग बुश को आतंकवादी कहकर नारे लगा रहे थे और वे अपने हाथों में तरह तरह के पोस्टर लिए हुए थे.

रैली में आए लोगों ने बीबीसी को बताया, "बुश इस्लाम और इंसानियत, दोनों के दुश्मन हैं और इसलिए उनका विरोध जायज़ है."

रैली में भाग लेने वालों से हुई बातचीत के बाद बीबीसी संवाददाताओं ने कहा कि आंदोलनकारी आमतौर पर पूर्वी एशियाई देशों में अमरीकी हमले का विरोध कर रहे थे.

 बुश इस्लाम और इंसानियत, दोनों के दुश्मन हैं और इसलिए उनका विरोध जायज़ है
एक प्रदर्शनकारी

लेकिन बहुत से प्रदर्शनकारियों का मानना था कि डेनमार्क के अख़बार ने अमरीका के बढ़ावे पर ही हज़रत मोहम्मद का कार्टून प्रकाशित किया था और इसलिए बुश का विरोध किया जाना चाहिए.

इस रैली में भाग लेने के लिए उत्तरी भारत के कई राज्यों से लोग दिल्ली आए हुए थे.

विरोध

इससे पहले मंगलवार की शाम जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में बुद्धिजीवियों ने भी एक विरोध प्रदर्शन किया.

इसमें लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरूंधती रॉय, लेखक विष्णु नागर, सामजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण सहित कई महत्वपूर्ण लोग थे.

वहाँ बुश विरोधी भाषण हुए, अमरीका विरोधी कविताएँ पढ़ी गईं और नाटक खेले गए.

वहाँ कुछ अमरीका विरोधी फ़िल्में भी दिखाई गईं.

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