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बुधवार, 01 मार्च, 2006 को 07:00 GMT तक के समाचार
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राष्ट्रपति बुश आज से भारत दौरे पर
बुश भारत यात्रा पर रवाना होते हुए
जॉर्ज बुश का मानना है कि भारत इस क्षेत्र में अहम भूमिका अदा कर सकता है
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश बुधवार रात को तीन दिवसीय भारत दौरा शुरू कर रहे हैं.

इस बीच दोनों देशों के बीच परमाणु सहयोग पर सहमति बनाने की कोशिशें जारी हैं. यह मामला अब भी उलझा हुआ माना जा रहा है.

राष्ट्रपति बुश की यात्रा के ठीक पहले भारत ने स्पष्ट किया कि यह मामला जटिल है और कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर भारत कुछ और स्पष्टीकरण चाहता है.

भारतीय विदेश सचिव श्याम सरन ने बुश की भारत यात्रा की जानकारी देते हुए कहा कि दोनों देश परमाणु सहयोग की दिशा में अच्छी प्रगति तय करने में सफल हुए हैं. पर अब भी एक अंतराल है जिसे पार करना है.

इसके पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की इस माँग को नामंज़ूर कर दिया है कि भारत अपने देसी फ़ास्ट ब्रीडर परमाणु कार्यक्रम पर कुछ रोक लगाए.

संसद में एक बयान में प्रधानमंत्री ने कहा है कि देश की परमाणु स्वायत्तता को दाँव पर नहीं लगाया जाएगा.

इधर सोमवार को अमरीकी विदेश मंत्री कॉंडोलीज़ा राइस ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से टेलीफ़ोन पर बात की.

भारत रवाना होने से पहले राष्ट्रपति बुश ने उम्मीद जताई कि भारत यात्रा के दौरान असैनिक परमाणु सहयोग के मामले में सहमति बन सकेगी.

भारत यात्रा पर जाने से पहले एक भारतीय समाचारपत्र से बातचीत में अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि वे अपने इस दौरे को लेकर बहुत उत्साहित हैं.

बुश ने स्वीकार किया कि असैनिक परमाणु सहयोग में अभी कई मसले ऐसे हैं जिनका हल निकालना होगा लेकिन उन्होंने आशा प्रकट की कि भारत और अमरीका सहयोग के नए रास्ते पर क़दम आगे बढ़ाएँगे.

अहम यात्रा

पिछले लगभग 60 वर्षों में भारत, अमरीकी राष्ट्रपतियों के दौरों का पड़ाव कम ही बना है.

 दोनों देश परमाणु सहयोग की दिशा में अच्छी प्रगति तय करने में सफल हुए हैं. पर अब भी एक अंतराल है जिसे पार करना है
श्याम सरन, भारतीय विदेश सचिव

राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश भारत की यात्रा करने वाले पाँचवें अमरीकी राष्ट्रपति होंगे. इससे पहले डेविड आइज़नहावर, रिचर्ड निक्सन, जिमी कार्टर और बिल क्लिंटन बतौर राष्ट्रपति भारत की यात्रा कर चुके हैं.

राष्ट्रपति बुश अपनी भारत यात्रा के दौरान हैदराबाद भी जाएँगे. दोनों पक्षों को उम्मीद है कि इस यात्रा के दौरान कृषि, जैव तकनीक, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और ऊर्जा के क्षेत्र में समझौते होंगे.

भारतीय विदेश सचिव श्याम सरन ने बताया कि ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देश साझा ऐलान कर सकते हैं.

अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि वह भारत को एक 'ज़िम्मेदार शक्ति' मानते हैं और उसके साथ सहयोग करने के इच्छुक हैं.

विरोध और सुरक्षा

बुश दिल्ली के मोर्य शेरेटन होटल में ठहरेंगे और वहाँ सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं.

 राष्ट्रपति बुश साम्राज्यवाद के सबसे बड़े प्रतीक हैं. उनका भारत में स्वागत नहीं है
एबी बर्धन, सीपीआई महासचिव

इसके अलावा जहाँ-जहाँ राष्ट्रपति बुश जाएंगे, वहाँ सुरक्षा एजेंसियों ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है.

पुराने क़िले से राष्ट्रपति बुश भारत के चुनिंदा राजनीतिज्ञों और कॉपरेट जगत के लोगों को संबोधित करेंगे, वहाँ सुरक्षा के विशेष इंतज़ाम किए गए हैं.

इधर बुश की यात्रा के जोरदार विरोध की भी तैयारी है. विरोध का मुद्दा इराक़ पर हमला और ईरान को परमाणु मुद्दे पर सुरक्षा परिषद में ले जाना है. वामपंथी दलों ने दिल्ली और हैदराबाद में प्रदर्शनों का आयोजन किया है.

सीपीआई महासचिव एबी बर्धन का कहना था, "राष्ट्रपति बुश साम्राज्यवाद के सबसे बड़े प्रतीक हैं. उनका भारत में स्वागत नहीं है."

मनमोहन और बुशपरमाणु मसले की छाप
अमरीकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा से पहले सुर्खियों में है परमाणु समझौता.
भारत और अमरीका के झंडेसहयोग या दबाव
भारत की विदेश नीति पर अमरीका का दबाव है या संबंधों का स्वाभाविक असर.
भारत और पाकिस्तान के झंडेमध्यस्थता: बिल्कुल नहीं
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